अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। अगर स्कूल में पढ़ने वाले किसी विद्यार्थी का आधार कार्ड किसी वजह से नहीं बन सका या किसी बच्चे के फिंगर प्रिंट मैच नहीं करते तो इसके लिए सीधे तौर पर स्कूल इंचार्ज जिम्मेवार होगा। ऐसा आदेश अंबाला जिले के ब्लॉक अंबाला वन के स्कूलों में संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी ने दिए हैं।
खंड के शिक्षा अधिकारी ने खंड के सभी स्कूलों में एक लेटर जारी की है, जिसमें स्कूलों के स्कूल इंचार्जों को 9 अक्तूबर तक यह लिखकर देना था कि विद्यार्थियों को डाटा बिल्कुल सही है व अब कोई भी विद्यार्थी शेष नहीं रह गया है। सभी के आधार कार्ड बैंक खाते से लिंक है। अगर किसी कारण विद्यार्थी को मिलने वाला लाभ नहीं मिल पा रहा है तो संबंधित टीचर व स्कूल इंचार्ज जिम्मेवार होंगे। यदि एक विद्यार्थी को दो स्कीमों के लाभ के लिए डाटा भेजा है तो यदि उस विद्यार्थी को लाभ नहीं मिल रहा है और किसी अन्य खाते में लाभ की राशि जा रही है तो उसकी रिकवरी भी स्कूल इंचार्ज से होगी। इन आदेशों के बाद स्कूल इंचार्ज व टीचरों में खलबली मची हुई है कि बच्चे के बैंक खाते में राशि कम आए या अधिक उन्हें परेशान क्यों किया जा रहा है। अब तक बेहद कम स्कूलों की ओर से ही यह लिखकर दिया है। इस बारे में स्कूल इंचार्जो व टीचरों का तर्क है कि कई बार बच्चों के अंगुठे मैच नहीं हो पाते है और इस कारण उनको मिलने वाली लाभ राशि रुक जाती है। ऐसे में उन पर सारा ठीकरा फोड़ना ठीक नहीं है। टीचरों ने इसे तुगलकी फरमान बताया है।
तुगलकी फरमान लिया जाए वापस
शिक्षा विभाग की ओर से दिए गए तुगलकी आदेशों के कारण टीचरों में रोष है। वहीं टीचरों का कहना है कि अगर बच्चे के बैंक खाते में पैसे अधिक या कम आते है तो इसके लिए स्कूल इंचार्ज दोषी कैसे हो सकता है। उससे रिकवरी क्यों होगी। जब उसने उस राशि को निकाला ही नहीं है। स्कूल इंचार्ज व टीचरों की मानें तो वे केवल बैंक खातें संबंधी कार्रवाई को पूरी कर सकते है। न तो वह बच्चे के बैंक खाते से राशि निकालता है और न ही उस राशि का वह प्रयोग करता है। ऐसे में उनसे रिकवरी किया जाना गलत है।
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अगर स्कूल में पढ़ने वाले किसी विद्यार्थी का आधार कार्ड किसी वजह से नहीं बन सका या किसी बच्चे के फिंगर प्रिंट मैच नहीं करते तो इसके लिए सीधे तौर पर स्कूल इंचार्ज जिम्मेवार होगा, क्योंकि यह पूरी तरह से स्कूल इंचार्ज की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चे के सभी दस्तावेज चेक करके लिए जाएं। यह नियम सभी प्राइवेट व सरकारी स्कूलों पर लागू है। अगर किसी स्कूल की ओर से 9 अक्तूबर तक इसमें कोई कार्रवाई नहीं की तो विभाग इसके लिए स्कूलों को कुछ समय और दे सकता है, लेकिन उसके बाद भी अगर स्कूल इसमें लापरवाही दिखाएंगे तो इसमें स्कूल इंचार्ज को जिम्मेदार माना जाएगा।
उर्मा शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।