अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। राज्य स्तरीय विद्यालय क्रीड़ा प्रतियोगिता के अंडर-19 गर्ल्स फुटबॉल का खिताब भिवानी के सिर सजा है। टीम ने हिसार को हराकर यह मुकाम हासिल किया है। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी उमा शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भाग लेना अहम है, जबकि लड़कियों के लिए तो यह और भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि खेलों में एक अच्छा करियर है, जिसे खिलाड़ी अपना सकते हैं। उन्होंने विजेता टीम को जहां बधाई दी, वहीं अन्य टीमों को भी प्रोत्साहित किया। जीएमएन पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल शीतल शर्मा ने कहा कि यह प्रतिभाएं देश की धरोहर है। इनको संरक्षण प्रदान करना हम सब का कर्तव्य है। आज का युग प्रतिस्पर्धा का युग है और इसके लिए कड़ी मेहनत करके भविष्य का निर्माण करे। उन्होंने बताया कि हार से खिलाड़ी को निराश नहीं होना चाहिए बल्कि प्रेरणा व सीख लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि फुटबॉल का सेमीफाइनल मैच हिसार व जींद के बीच तथा कैथल व भिवानी के बीच हुआ। इस में हिसार व भिवानी फाइनल में पहुंची। फाइनल मैच में भिवानी की टीम ने जीत दर्ज की। विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर स्कूल के निर्देशक आलोक गुप्ता, जीएमएन कॉलेज के प्रधानाचार्य आरपी सिंह भी मौजूद रहे।
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अंबाला में महिला फुटबॉल को संजीवनी की जरूरत
- स्कूल स्टेट गेम्स में अंबाला की अंडर 19 फुटबाल टूर्नामेंट में फिसड्डी साबित हुई
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। अंबाला में महिला फुटबॉल को संजीवनी की जरूरत है, जबकि अभी यह जिला में अपने पहले कदम पर ही देखी जा रही है। हालात यह हैं कि स्कूलों में टीमें नहीं हैं, जबकि मैदानों की भी कमी है। दूसरी ओर स्कूल लेवल पर लड़कियों की टीमों को लेकर माहौल ही नहीं बन पाया, जबकि प्रतियोगिताओं में मात्र भागीदारी तक ही सीमित हैं। अंबाला में पुरुष फुटबॉल का इतिहास काफी बेहतरीन रहा है। अंबाला का हीरोज क्लब पूरे देश में जाना पहचाना नाम था। इस क्लब ने जहां देश के नामी मोहम्मडन स्पोर्टिंग, मोहन बागान, जेसीटी फगवाड़ा जैसी टीमों को अंबाला में मात दी, वहीं अंबाला में एसडी चटर्जी जैसे कोच भी हुए, जिन्होंने फुटबॉल को ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। अंबाला में हर रविवार को स्कूलों की टीमों के बीच फुटबॉल मैच भी हुआ करते थे, जो आज बंद हैं।
यह है महिला फुटबॉल की हालत
अंबाला में महिला फुटबॉल को लेकर जागरूकता नहीं है। स्कूलों की बात करें, तो यहां पर प्रतियोगिता से कुछ दिनों पहले ही गर्ल्स स्टूडेंट्स की टीम बनाई जाती है। यही कारण है कि स्कूल गेम्स के तहत ब्लाक लेवल पर तो कई बार इसकी प्रतियोगिता ही नहीं हो पाती। दूसरी ओर अंबाला में कुछ ही स्कूल हैं, जिनकी टीम है, जबकि अधिकतर स्कूलों में लड़कियों की फुटबाल टीम ही नहीं है। फुटबाल एसोसिएशन अब प्रयास कर रही है, लेकिन माना जा रहा है कि अभी इस गेम को लेकर गर्ल्स फुटबॉल अपने आरंभिक चरण में ही है।
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यह सही है कि टीमों को लेकर चिंता रहती है, लेकिन अब अंबाला में स्कूल लेवल पर क्लब बनाकर प्रतियोगिता करवाई जाएगी। इसके लिए तैयारी की जाएगी और उम्मीद है कि लड़कियां भी हर आयु वर्ग में इस गेम के लिए आगे आएंगी।
- राजिंद्र सिंह जिंदू, एईओ, शिक्षा विभाग, अंबाला।
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सालभर में चार से पांच प्रतियोगिताएं हो जाती है, लेकिन अभी लड़कियां इस खेल में ज्यादा आगे नहीं आ रही हैं। इसके लिए महिला फुटबॉल को लेकर माहौल तैयार करना होगा और उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों में अंबाला से भी लड़कियों में फुटबॉल के प्रति क्रेज बढ़ेगा।
- रविंदर कुमार, फुटबॉल कोच, अंबाला।