अंबाला। गरीबों और जरूरतमंदों से जुड़ी सुविधाएं रख-रखाव के अभाव में खत्म हो रही हैं और इससे सरकार के लाखों रुपये भी बर्बाद हो रहे हैं।
ऐसे हालात लगभग छह साल पहले अंबाला कैंट बस अड्डे के बाहर बनाए गए रैन बसेरे के हैं। जहां सुविधाओं के नाम पर गंदगी, छत से उतारे गए सोलर पैनल, खराब आरओ, टूटी कुर्सियां, सीसीटीवी कैमरे खराब, टूटे खिड़की और दरवाजे रैन बसेरे की सच्चाई बयां कर रहे हैं।
इस कारण अब कोई भी इस रैन बसेरे में रहने के लिए नहीं आता। जबकि पूर्व खेल एवं स्वास्थ्य मंत्री और अंबाला छावनी के विधायक अनिल विज ने आमजन और बाहर से आने वाले यात्रियों की सुविधा को देखते हुए इस रैन बसेरे का निर्माण करवाया था। जोकि अफसरों की कमी से अब धूल फांक रहा है और इसलिए लोगों को नजदीक ही बने होटलों में महंगे दामों पर कमरे लेकर रात बितानी पड़ रही है।
नवंबर 2018 में मिली थी सुविधा, 76 लाख हुए थे खर्च
लगभग 76 लाख रुपये की लागत से अंबाला कैंट के बस अड्डे के बाहर रैन बसेरे का निर्माण करवाया गया था जोकि 22 नवंबर 2018 को पूर्व खेल एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने जनता व जरूरतमंदों को समर्पित किया था। इस रैन बसेरे में लगभग 176 यात्रियों के रात गुजारने की सुविधा थी। इसमें महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग अलग ठहरने का प्रबंध किया गया था।
कोरोना महामारी के दौरान रैन बसेरा मरीजों के लिए एक सौगात बनकर रहा। लेकिन अब इस रैन बसेरे में सुविधाएं कम और असुविधाओं का आलम है। पीने के पानी के लिए लगे आरओ पिछले दो साल से खराब हैं। वहीं, दो सोलर पैनल टूटे पड़े हैं, अग्निशमन यंत्रों की तारीख निकल चुकी है, सीसीटीवी कैमरे खराब, एलसीडी, खिड़कियां व दरवाजे टूटे, शौचालयों में पानी नहीं, इन्वर्टर की बैटरियां खराब, सभी कमरों और कार्यालय में लगे पंखे व लाइट खराब, यात्रियों के सामान को सुरक्षित रखने के लिए नहीं कोई सुविधा, लाइट चली जाने पर जेनरेटर की सुविधा नहीं है। बैड की संख्या 176 होनी चाहिए जोकि 76 है। रैन बसेरे की खामियों के सुधार को लेकर इंजीनियरिंग विभाग द्वारा अनुमानित लागत तैयार की गई है। जल्द ही इसकी निविदा जारी कर दी जाएगी ताकि सुधार की प्रक्रिया शुरु की जा सके।
रविंद्र कुहाड़, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर।
रैन बसेरे में गंदगी का आलम। संवाद
रैन बसेरे में गंदगी का आलम। संवाद