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45 करोड़ का नुकसान, रोडवेज, रेलवे यातायात प्रभावित

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45 करोड़ का नुकसान, रोडवेज, रेलवे यातायात प्रभावित
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। एससी/एसटी कानून में बदलाव के चलते दलित समाज के भारत बंद का असर अंबाला में भी रहा। सोमवार को बंद के चलते करीब 45 करोड़ रुपये का नुकसान कारोबारियों को हुआ। रेलवे को आठ ट्रेनें रद्द करनी पड़ी, जबकि 13 ट्रेन आंशिक रूप से रद्द की गईं। इसी तरह रोडवेज की लगभग बीस बसें पंजाब नहीं गईं। पंजाब से भी एक भी बस अंबाला नहीं आई। दूसरी ओर ट्रांसपोर्टर्स के ट्रक भी नहीं निकले। सोमवार को कारोबारी अपना सामान भी अन्य जिलों और राज्यों के लिए रवाना नहीं कर पाए।
भारत बंद के चलते जिले के ट्रांसपोर्टर्स परेशान रहे। उनके ट्रक जहां पर भी थे, वहीं फंसे रह गए। बंद को देखते हुए सोमवार को ट्रांसपोर्टर्स कोई सामान लेकर कोई भी ट्रक रवाना नहीं किया। ट्रांसपोर्टर प्रेम रतन गोसाईं ने बताया कि भारत बंद के कारण कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इस कारण अपने ट्रक रवाना नहीं किए।
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एससी/एसटी वर्ग के राजनीतिक नुमाइंदे साथ आएं : मल
अंबाला सिटी। एससी एसटी एक्ट के बदलावों के विरोध में दलित समुदाय ने शहर की सड़कों पर रोष मार्च निकाला। साथ ही दुकानों को बंद कराया। अंबाला में दलित समुदाय के प्रदर्शन में अंबाला के मेयर रमेश मल भी शामिल हुए। उन्होंने कहा उनके समुदाय का नेतृत्व करने वाले सहयोग करें अन्यथा उनका मुंह काला किया जाएगा। सोमवार सुबह करीब साढ़े सात बजे से ही सिटी की सड़कों पर दलित समाज के लोग घूमने लगे थे। सभी दुकानें बंद रखने की अपील कर रहे थे। इसके बाद सभी मेयर रमेश मल के नेतृत्व में जगाधरी गेट पर एकत्रित हुए। वहां से पैदल रोष मार्च निकालते हुए सिटी के मुख्य बाजारों से गुजरे। इस दौरान पुतले भी फूंके।

नारायणगढ़ में निकाला मार्च, सौंपा ज्ञापन
नारायणगढ़। एससी/एसटी एक्ट के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के खिलाफ भारत बंद के आह्वान पर सोमवार को स्थानीय बाजार पूरी तरह से बंद रहे। दलित संगठनों ने शहर में रोष प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संगठनों के पदाधिकारी और सदस्यों सहित अन्य लोग पहले स्थानीय अंबेडकर भवन में एकत्रित हुए। इसके बाद जुलूस की शक्ल में हजारों प्रदर्शनकारी मुख्य बाजारों से होते हुए स्थानीय लघु सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा एवं सीआईटीयू हरियाणा के आह्वान पर सरकारी विभागों के कर्मचारियों, परियोजना वर्करों और भवन निर्माण के मजदूरों के साथ ग्रामीण सफाई कर्मचारियों, वन मजदूरों आदि ने प्रदर्शन किया। स्थानीय सामुदायिक केंद्र में नगरपालिका कर्मचारी संघ के प्रधान मांगे साहिब की अध्यक्षता में एकत्रित होकर एससी-एसटी कानून में किए गए बदलावों की आलोचना की। इस दौरान सीआईटीयू के जिला सचिव रमेश कुमार, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य आडीटर सतीश सेठी, मिड-डे-मील वर्कर यूनियन की प्रधान राजेश कुमारी, ग्रामीण चौकीदार यूनियन के प्रधान बाबू राम सहित सतनाम सिंह, सतपाल चौहान, मास्टर बृज मोहन, पुरुषोत्तम, चमन लाल धीमान, अमर सिंह कंजाला, धर्मवीर, श्याम लाल, राजकुमार, बृजभूषण आदि मौजूद रहे।

बराड़ा में बंद रहे बाजार
बराड़ा। एससी/एसटी एक्ट में बदलाव और विश्वविद्यालय के स्वायत्तता के नाम पर निजीकरण के विरोध में बराड़ा में भी सभी संगठनों ने बाजार बंद रखे। अनाजमंडी से शुरू होकर प्रदर्शनकारी एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां पर इन सभी ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने एसडीएम बराड़ा को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चेयरमैन अनुसूचित जाति जनजाति आयोग, केंद्रीय मंत्री कानून एवं न्याय को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

अनहोनी की अफवाह से सहमे दुकानदार
मुलाना। दोसड़का में कुछ युवाओं ने विरोध स्वरूप चौक पर एक टायर में आग लगा दी। इस दौरान अनहोनी की अफवाह से लोग सहम गए। दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद कर दीं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार की शवयात्रा निकाली और दोसड़का चौक पर पुतलों को फूंका। दोसड़का बाजार में दुकानदार बंद दुकानों के आगे बैठे नजर आए। एसडीएम गिरीश कुमार, डीएसपी सुधीर तनेजा, मुलाना थाना प्रभारी राजेश कुमार दल-बल सहित मौके पर मौजूद रहे। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाकर जाम खुलवाया। प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने एसडीएम बराड़ा को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। विरोध प्रदर्शन में कुछ बाइक सवार युवक डंडे और बिंडे सहित पहुंचे।
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सिटी में रोष मार्च निकालकर दुकानें बंद करवाते हुए दलित समुदाय के लोग एनएच वन पर पहुंच गए। वहां उन्होंने किंगफिशर के पास जाम लगा दिया। इस दौरान पंजाब, दिल्ली और चंडीगढ़ जाने वाले रास्ते बंद कर दिए। करीब दो घंटे तक लगे जाम के बाद उपायुक्त ने उनकी मांग का ज्ञापन मौके पर जाकर लिया और जाम खुलवाया। इस दौरान एक निहंग सिख जाम में से गुजरकर पंजाब की ओर जाने की जिद पर अड़ गया। उसका कहना था कि उसे कुछ इमरजेंसी है और उसका जाना जरूरी है। लोगों ने उसे रोकते हुए उसकी कार को पीछे धकेलना शुरू कर दिया। इसी बीच दलित समुदाय के लोगों में से किसी ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर दिया। इससे वह वह भड़क गया और कार से उतरकर उसने तलवार निकाल ली। इस दौरान काफी देर तक हंगामा हुआ। उन्होंने कहा कि वह आजाद देश का आजाद नागरिक है। उसे इस तरह कहीं भी आने-जाने से नहीं रोका जा सकता। उसने कहा कि उसने कुछ इमरजेंसी काम से सुल्तानपुर जाना है। सिख के आगे भीड़ की एक नहीं चली और वो अपनी कार ले जाकर ही माना।
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