फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: पोर्टल पर चढ़े 486 बच्चों की जांच, कुपोषित केवल 36

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला सिटी। पोषण ट्रैकर पर जिला में 843 कुपोषित बच्चे मिलने पर एसीएस हेल्थ की ओर से जांच में तेजी आ गई है। एक दो दिन में सभी की रिपोर्ट मिल जाएगी। बाल विकास विभाग ने मान लिया है कि आंगनबाड़ी वर्करों से डाटा चढ़ाने में गलती हुई है।
विज्ञापन

विभाग का मानना है कि पोर्टल कुपोषण के मामले दोगुने से अधिक दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में अभी तक 486 बच्चों को जांचा है। इनमें से सिर्फ 36 बच्चे ही कुपोषित मिले। इसके साथ ही 12 बच्चे ऐसे मिले जिनमें हल्की कमजोरी मिली है। अगर ये बच्चे दवा देने के बाद ठीक हो जाते हैं तो इन्हें कुपोषित नहीं माना जाएगा।
अब भी बच्चों की जांच हो रही है। बाल विकास विभाग की जिला समन्वयक अनीता ने बताया कि आंगनबाड़ी वर्कर की ओर से डाटा चढ़ाने में गलती हो रही है। पोर्टल पर अगर बच्चों के कद और वजन के बिंदु एक या दो प्वाइंट भी ऊपर नीचे हो जाते हैं तो बच्चों को कुपोषित वर्ग दिखने लगते हैं। इसी कारण यह डाटा गलत चढ़ गया है। जिसे अब दुरुस्त करवाया जा रहा है।
विज्ञापन




प्रशिक्षण में कमजोर को मान रहे कारण

आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान अनुपमा ने बताया कि कार्यकर्ताओं को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है मगर यह प्रशिक्षण आंगनबाड़ी वर्कर्स की ओर से ही दिलाया जाता है। इस कारण गुणवत्ता में कमी होती है। इसके साथ ही सरकार की ओर से सैम पोर्टल पर डाटा चढ़ाने के लिए जो मोबाइल और ऐप दिए हैं, उनमें भी कमी है। सभी मोबाइल पुरानी तकनीक के हैं। इस कारण बार-बार हैंग होते हैं। इससे डाटा चढ़ाने में भी गलतियां हो जाती हैं। हमारी ओर से कई बार उच्च गुणवत्ता वाले मोबाइल फोन की मांग रखी गई है मगर अभी तक सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना है। सरकार को आंगनबाड़ी वर्कर्स की उच्च गुणवत्ता ट्रेनिंग करानी चाहिए, जिससे वह सही तरीके से अपना काम सीख जाएं।

इन केंद्रों के डाटा में हो रहा सुधार

जिला समन्वयक अनीता ने बताया की हाल ही में बराड़ा और साहा क्षेत्र में शामिल आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का डाटा सुधारा जा रहा है। पोर्टल पर बच्चों के कद और वजन के अनुसार एंट्री की जाती है। इसके आधार पर पोर्टल अपने आप ही बच्चों को पोषण और कुपोषित वर्ग में शामिल कर देता है।

आंगनबाड़ियों में नहीं मिल रहे बच्चे

सत्यापन के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम में लगातार आंगनबाड़ी केंद्रों में जा रही हैं। मगर केंद्रों में बच्चे ही नहीं मिल रहे हैं ऐसे में सत्यापन का काम भी प्रभावित हो रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि बच्चे छुट्टियों के कारण नहीं आ रहे हैं। इसलिए बच्चों का सत्यापन भी धीमा पड़ गया है।

वर्जन

आंगनबाड़ी केंद्रों की ओर से एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया है। छुट्टियों के कारण बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। इसके बाद सभी का सत्यापन पूरा हो जाएगा।
विज्ञापन

-डॉ. मयंक गुप्ता, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, अंबाला।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें