अंबाला सिटी डिपो में खड़ी हरियाणा रोडवेज की सामान्य बसें। संवाद
अंबाला। रोडवेज में बस चालकों की कमी यात्रियों को परेशान कर रही है। हालात यह है कि हर दिन करीब 30 चालक अवकाश पर रहते हैं। इस कारण लंबे रूट की बसों का संचालन बंद करना पड़ रहा है। प्रभावित रूटों में उत्तराखंड, पंजाब, दिल्ली और जम्मू शामिल हैं।
दरअसल, कई रूट ऐसे हैं जिन पर एक ही चालक बस को संचालित करता है। इनके अवकाश पर जाने के बाद दूसरा चालक न होने के कारण उस रूट को अस्थाई रूप से बंद कर दिया जाता है। जब चालक अवकाश से लौट आते हैं तो रोडवेज रूट को संचालित कर देती है। वहीं कुछ रूटों पर समायोजन कर भी व्यवस्था की जाती है। मगर इससे अन्य रूटों पर दबाव बढ़ जाता है।
चालकों के 100 पद खाली
रोडवेज चालकों की भर्ती पर नजर डालें तो वर्ष 2008, 2016 और 2018 में भर्ती की गई थी। इसमें प्रदेशभर को रोडवेज के चालक मिले थे। इसके बावजूद अंबाला में चालकों के करीब 100 पद खाली हैं। मौजूदा समय में 193 चालक तैनात हैं जो 190 बसें संचालित करते हैं। इसी आंकड़ें से समझा जा सकता है कि चालकों की कमी किस प्रकार से रोडवेज पर दबाव डाल रही है। पिछले महीने ही पदोन्नति और सेवानिवृत्ति में कुल 14 चालक पद मुक्त हो चुके हैं।
ये पड़ रहा असर
नारायणगढ़ सब डिपो से हरिद्वार के लिए सुबह साढ़े सात बजे बस संचालित होती है। इस बस का चालक अगर अवकाश ले तो बस को बंद कर दिया जाता है। क्योंकि दूसरे चालक की व्यवस्था नहीं है। नारायणगढ़ के मुख्य बाजार निवासी संजीव अग्रवाल बताते हैं कि रूटीन में बस मिल जाती है मगर कई बार बस न होने से दिक्कत होती है। इसी तरह से जम्मू कटरा के दो परमिट होने के बावजूद यह रूट बंद पड़ा है। इस रूट पर जो चालक कार्य करते थे वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसी प्रकार से लुधियाना से दिल्ली और पटियाला से दिल्ली रूट भी चालक की कमी को झेल रहे हैं। पटियाला निवासी शिक्षिका अरुंधती बताती हैं कि वह अंबाला कैंट के एक निजी स्कूल में पढ़ाती हैं उन्हें सुबह आना पड़ता है। कई बार बस नहीं मिली तो परिजनों की गाड़ी या प्राइवेट साधनों से आती हैं।
वर्जन
चालकों की कमी का असर कई रूटों पर देखने को मिल रहा है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।
-संजीव बराड़ा, ड्यूटी इंस्पेक्टर, नारायणगढ़