अंबाला छावनी बस स्टैंड परिसर में लगे कैमरे बंद पडे़ हुए। संवाद
अंबाला। छावनी का मुख्य बस अड्डा की सुरक्षा राम भरोसे है। पिछले तीन दिनों से बस अड्डा परिसर में 24 सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह से बंद पड़े हैं। पूरे परिसर में केवल तीन कैमरे ही चालू हालत में हैं, ऐसे में यदि बस अड्डे पर कोई अप्रिय घटना या वारदात हो जाए, तो इसकी जिम्मेदार किसकी होगी। विभागीय अधिकारी भी इस गंभीर लापरवाही पर आंखें मूंदे बैठे हैं। छावनी का यह बस अड्डा क्षेत्र का मुख्य और सबसे व्यस्त केंद्र है। यहां से रोजाना करीब 800 बसों का संचालन होता है और लगभग 10 हजार से अधिक यात्रियों का आना-जाना लगा रहता है। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही वाले स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था का ऐसा हाल चिंताजनक है। कैमरों के बंद होने से जेबकतरों, चोरों और असमाजिक तत्वों का खतरा बढ़ गया है।
आंधी में टूटे थे तार, अब तक नहीं सुधरे हालात
मामले के लिए जब संस्थान प्रबंधक और मुख्य इंस्पेक्टर रमेश से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कैमरे बंद होने के बारे में महाप्रबंधक अश्वनी डोगरा को जानकारी दे दी गई थी। बीती 13 मई की रात को आई तेज आंधी के कारण बस अड्डा परिसर में दो पेड़ टूटकर गिर गए थे। इसकी चपेट में आने से सीसीटीवी कैमरों के तार टूट गए थे इसके बाद से सिस्टम ठप पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि तीन दिन बीत जाने के बाद भी तारों को जोड़ने या सिस्टम को ठीक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
बिजली कटते ही हो जाता है ब्लैकआउट
लापरवाही का आलम केवल तारों के टूटने तक ही सीमित नहीं है। बस अड्डे पर बिजली गुल होने के बाद भी ये सीसीटीवी कैमरे घंटों बंद रहते हैं। सुरक्षा के इतने बड़े उपकरण लगाने के बावजूद इन्हें अभी तक बस अड्डे के बैकअप जनरेटर से नहीं जोड़ा गया है। जैसे ही लाइट जाती है, पूरा बस अड्डा परिसर पूरी तरह कैमरों की निगरानी से बाहर हो जाता है जबकि परिसर में जेनरेटर तो है, लेकिन इसका कनेक्शन रोडवेज के पास नहीं है।
अंबाला छावनी बस स्टैंड परिसर में लगे कैमरे बंद पडे़ हुए। संवाद