एक बार फिर से एप के जरिये गंदगी मिटाने की तैयारी
बीते एक दशक में आईं योजनाओं पर योजजनाएं, लेकिन ट्विन सिटी नहीं हुई साफ
गंदगी के साथ गलियों में छाए अंधेरे को भी दूर करने की बनाई जा रही योजना
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। एक दशक बीतने के बाद भी ट्विन सिटी को साफ सुथरा नहीं किया जा सका है। एक के बाद एक योजनाएं अमल में लाईं गईं, लेकिन फिर भी वह टारगेट हासिल नहीं किया जा सका, जिसकी उम्मीद थी। एक दशक में निकाय प्रशासन ने जिन योजनाओं को जमीन पर उतारा, वे औंधे मुंह गिर चुकी हैं। अब एक बार फिर से एप के जरिये नए रंग रूप में जहां गंदगी से जूझने की तैयारी है, वहीं गलियों में छाए अंधेरे को दूर करने की भी कोशिशों की तैयारी की जा रही है।
अब यह योजना ला रहा प्रशासन
प्रशासन अब गंदगी से निपटने के लिए आम जनता को अपने साथ जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इस बार जहां गंदगी को टारगेट किया जाएगा, वहीं स्ट्रीट लाइटों की लगातार मिल रही शिकायतों को निपटाने के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम यानी एप के जरिये नजर रखने की तैयारी है। उल्लेखनीय है कि करीब एक साल पहले भी नगर निगम ने सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए एप जारी किया था, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं दिखा। इससे पहले और बाद में भी तमाम योजनाएं लाईं गईं, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।
यह योजनाएं जो धरी रह गईं
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पटवी एक दशक से बंद है।
- रात के समय बाजारों की सफाई योजना फ्लॉप हो गई।
- ट्विन सिटी में सुलभ इंटरनेशनल के साथ सफाई कर्मचारी देने का समझौता योजना पर विवाद
- योजना ओए की शुरुआत की गई, लेकिन इसका असर नहीं दिखा।
- डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना ही विवादों में रही, हड़ताल के चलते हुई फ्लॉप।
- डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की मॉनीटरिंग के लिए योजना शुरू ही नहीं हो पाई।
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में कूड़े से बिजली बनाने की योजना अभी कागजों तक सीमित।
- मोबाइल एप से गंदगी की फोटो खींचकर डालने की योजना भी असरदार नहीं।
यह कहते हैं लोग
योजनाओं को बनाने से पहले इसमें आने वाले खामियों पर काम करना चाहिए। जो भी योजना हो, उसका बैकअप अवश्य होना चाहिए, तभी यह कामयाब हो सकती है। निगम योजना तो लाता है, लेकिन उसकी सही तरीके से मॉनीटरिंग नहीं हो पाती, जिससे योजनाएं फेल होती जा रही हैं।
- डिंपल मित्तल, पूर्व पार्षद अंबाला कैंट
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योजनाएं लाना बुरी बात नहीं है, जबकि इसका परिणाम सामने आना चाहिए। यहीं पर निगम फेल होता दिख रहा है। तमाम योजनाओं का हश्र क्या हुआ, वह सामने है। दूसरा जनता को भी इस में सहयोग देना चाहिए ताकि ट्विन सिटी को साफ किया जाए। अब एप से इसकी मॉनीटरिंग करने की तैयारी है, अच्छा है, लेकिन इसकी मॉनीटरिंग सख्ती से की जाए।
-सुनील ठाकुर, पूर्व सदस्य, जिला कष्ट निवारण समिति अंबाला।
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स्वच्छ भारत के नाम पर दिन-रात ढिंढोरा पीटा जा रहा है, जबकि गंदगी के बड़े-बड़े ढेर इन दावों की पोल खोल रहे हैं। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के नाम पर करोडों रुपये का बजट बर्बाद किया गया। ओए योजना में अंबाला में स्वच्छ शहर बनाने के दावे किए गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
-जसबीर मलौर, सदस्य, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी।
कोट
निगम की कोशिश है कि एप के जरिये स्ट्रीट लाइटों व गंदगी की शिकायतों का निपटारा किया जाए। इसमें काफी मॉडिफिकेशन किए गए हैं, जिसके बाद आम जनता की शिकायतों का निपटारा तेजी से किया जा सकेगा।
-सतेंद्र सिवाच, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम अंबाला।