छह माह में टूटने लगा नेशनल हाईवे 344, आईं दरारें
बारिश ने सड़क निर्माण में उपयोग की गई घटिया सामग्री की खोली पोल
अधिकारी दरार को दरार मानने से कर रहे इंकार
वाहन चालकों को मारकंडा पुल से पहले मार्ग बंद का संकेतक दिखा तो पता चला कि रिपेयर हो रही है
फोटो नंबर :: 37 , 37ए
अमर उजाला ब्यूरो
मुलाना। करोड़ों रुपये की लागत से बनी नेशनल हाईवे 344 फोरलेन मार्ग के मानक तार-तार होते नजर आ रहे हैं। हाल में ही हुई बारिश ने सड़क निर्माण में उपयोग की गई घटिया सामग्री की पोल खोल दी है। मार्ग को लगभग छह महीने पहले ही यातायात के लिए शुरू किया गया था। क्षेत्र के लोगों की ड्रीम सड़क छह महीने के अंदर ही उनके सपने को चकनाचूर करती नजर आ रही है। हालांकि मार्ग पर काम कर रहे कंपनी के अधिकारी नेशनल हाईवे 344 पर आई दरार को दरार मानने से इंकार कर रहे हैं।
दरअसल मंगलवार को नवनिर्मित नेशनल हाईवे 344 पर मुलाना स्थित मारकंडा पुल से पहले मार्ग बंद का संकेतक लगा देख वाहन चालकों के मन में सवाल उठने लगे। लगभग दो हफ्ते पहले भी इसी जगह से विभाग द्वारा मार्ग के कुछ हिस्से को बंद किया गया था। वाहन चालकों ने पता किया तो जानकारी मिली कि नेशनल हाईवे पर दरार आ गई है जिसके चलते मार्ग को बंद किया गया है व रिपेयर का काम जारी है।
मारकंडा पुल से अगले पुल पर भी आई दरार
नेशनल हाईवे 344 पर स्थित मारकंडा पुल से अंबाला की तरफ अगले पुल पर भी दरार देखी जा रही है, जिससे वाहन चालक भयभीत हैं। वाहन चालकों के अनुसार दरार लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे बना रही कंपनी द्वारा सही मानकों पर कार्य नहीं किया गया है।
खानअहमदपुर के पास भी मार्ग में खामियां
खानअहमदपुर गांव के पास भी मार्ग पर किया गया पैच वर्क उखड़ने लगा है। वाहन चालकों के अनुसार मार्ग पर काम कर रही कंपनी केवल औपचारिकता पूरा कर रही है। सड़क की यह हालत देख कर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मार्ग पर सुगम यातायात का सफर लंबे समय के लिए नहीं है।
कोट्स
बारिश लंबे समय चली है, ऐसी समस्या अन्य मार्गों पर भी आ रही है। उक्त जगह पर आई खामी की प्राथमिकता के तौर पर जांच की जाएगी और उसे ठीक किया जाएगा।
- जसविंद्र सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई।
कोट्स
मार्ग पर दरार नहीं है, जबकि वहां रिपेयर का कार्य जारी है। मार्ग सही मानकों पर ही बना है और मार्ग को जल्द ही यातायात के खोल दिया जाएगा।
- राजबीर कुमार, लाइजनिंग ऑफिसर, सद्भाव कंपनी।