लाखों की फीस सरकार के खजाने में जमा, फैसले का इंतजार
मुलाना। करीब तीन दशक पहले तत्कालीन भजन लाल सरकार के कार्यकाल में वैद्य विशारद की डिग्री हासिल करने वाले चिकित्सकों की लाखों रुपये फीस जहां सरकार के खजाने में जमा है, वहीं अभी तक इस पर फैसला ही नहीं लिया जा सका है। प्रदेश भर से हजारों की संख्या में वैद्य विशारद ने यह फीस जमा करवाई थी, ताकि वे मेडिकल प्रैक्टिस कर सकें, लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
यह है मामला
करीब 25 साल पहले भजन लाल की कांग्रेस सरकार ने कौंसिल आफ इंडियन मेडिसन पंचकूला ने वैद्य विशारद की डिग्री रखने वालों से 1725 रुपये की फीस जमा करवाने को कहा था। इस में कहा गया था कि फीस देने के बाद इन चिकित्सकों को प्रेक्टिस करने की इजाजत दी जा सकती है। ऐसे में प्रदेश भर से हजारों की संख्या में वैद्य विशारद करने वालों ने उक्त कौंसिल के पास फीस जमा करवा दी। इन में से अधिकतर दूसरे जिलों से यह डिग्री हासिल करने वाले थे। फीस के रूप में उस वक्त कौंसिल के पास लाखों रुपये की फीस जमा हुई थी। फीस के साथ ही वैद्य विशारद की प्रथम व द्वितीय वर्ष के प्रमाण पत्र, डीएमसी, शपथ पत्र व अंकों की लिस्ट की प्रतियां ओथ कमिश्नर से सत्यापित प्रतियां जमा करवाई गई थी। इस बारे में मेहर सिंह, आरपी शर्मा, प्रवीण ने बताया कि कौंसिल द्वारा लाखों रुपये फीस के रूप में ले लिए गए हैं, जबकि अब तब कोई निर्णय नहीं लिया गया है। लगभग तीन दशक बीतने को हैं, जबकि अभी भी वैद्य विशारद इस इंतजार में हैं कि उनके केस का क्या होगा। ऐसे में इनका भविष्य अब धूमिल ही दिखाई दे रहा है।
हां, यह पैसा मेरे समय से पहले का है वैसे इस की एफडी करवाई हुई है। इसमें उस समय करीब 22 लाख रुपये की राशि जमा करवाई गई थी, जबकि मामला कोर्ट के अधीन है।
- डॉ. बहादुर सिंह, रजिस्ट्रार, कौंसिल आफ इंडियन मेडिसन पंचकूला