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धुंध भरे दिनों में संभलकर निकलें सैर करने, प्रदूषण बढ़ाएगा परेशानी

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अलर्ट : धुंध भरे दिनों में संभलकर निकलें सैर करने, प्रदूषण बढ़ाएगा परेशानी
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जब तब धुंध छंट न जाए, तब तक प्रदूषण के कण निचले लेवल पर रहते हैं
जिन बाजारों में जाम की स्थिति और वाहनों की आवाजाही ज्यादा, वहां पर भी खतरा
कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं इन स्थानों पर रहने वाले या दुकानदार
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। घनी धुंध का सीजन शुरू हो चुका है और यह स्थिति प्रदूषण को और बढ़ाएगी जिससे सावधान रहना होगा। इन दिनों अंबाला का पॉल्यूशन का लेवल 300 के आसपास बना हुआ है, जो खतरनाक है। सामान्यत: 200 से नीचे यह होना चाहिए, जबकि अधिक होने पर खतरनाक होता जाता है। वे इलाके ज्यादा खतरनाक हैं जहां से वाहनों की आवाजाही सबसे ज्यादा है और बार-बार जाम की स्थिति बनती है। इन इलाकों में रहने वाले यदि लंबे समय तक इस स्थिति के संपर्क में रहते हैं तो धीरे-धीरे सेहत पर असर पड़ना शुरू हो सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो धुंध भरे सीजन में यह दिक्कत सबसे ज्यादा सामने आने वाली है।
यह क्षेत्र हैं खतरनाक
अंबाला कैंट के ओवरब्रिज के नीचे व बस स्टैंड के आसपास का एरिया, सदर बाजार चौक, अंबाला-जगाधरी हाईवे इंदिरा चौक, गीता गोपाल चौक, सिटी में पॉलिटेक्निक चौक, बलदेव नगर, मानव चौक ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर प्रदूषण ज्यादा है। इन क्षेत्रों से वाहनों की आवाजाही ज्यादा होती है और दिनभर रह-रहकर जाम की स्थिति बनती है। जाम लगने के बाद वाहन ऑन रहते हैं और हाइड्रोकार्बन छोड़ते रहते हैं। आसपास के लोग लगातार इसके संपर्क में रहते हैं, जिनको आगे चलकर कई बीमारियां हो सकती हैं। इसी तरह हाईवे किनारे रहने वाले या दुकानदारी करने वाले भी इससे प्रभावित होते हैं।
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बिना मास्क ड्यूटी दे रहे ट्रैफिक कर्मी
ट्विन सिटी के कई ऐसे प्वाइंट हैं, जहां से वाहनों की आवाजाही सबसे अधिक है। ऐसी स्थिति में ट्रैफिक को कंट्रोल करने वाले पुलिस कर्मियों के पास न तो मास्क हैं और न ही प्रदूषण से बचने के लिए कोई उपाय है। दिनभर यह कर्मचारी वाहनों के धुएं के बीच अपनी ड्यूटी कर रहे हैं जिससे इनकी सेहत पर खतरा बढ़ रहा है।
सुबह की सैर भी खतरनाक
धुंध भरे सीजन में सुबह की सैर भी खतरनाक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो धुंध के सीजन में प्रदूषण के कण हवा में ही तैरते रहे हैं। धूप निकलने के बाद यह कण वातावरण में ऊंचा उठ जाते हैं, जिससे निचली सतह स्वच्छ हो जाती है। यदि सुबह बिना मास्क या रुमाल के सैर करने जाते हैं तो अलर्ट हो जाएं, क्योंकि यह खतरनाक साबित होगा। सैर या खुले में एक्सरसाइज करने से श्वसन प्रक्रिया तेज होती है और प्रदूषण के कण सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं।
यह परेशानी हो सकती है
- सांस संबंधी रोग हो सकते हैं।
- हृदय रोग की समस्या हो सकती है।
- स्किन एलर्जी हो सकती है।
- आंखों में जलन की परेशानी हो सकती है।
- लंबे समय तक इसकी चपेट में रहने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
यह कहते हैं विशेषज्ञ
जिस तरह से वाहनों की संख्या बढ़ रही है, उसी तरह प्रदूषण भी बढ़ रहा है। सामान्यता: एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स / वायु गुणवत्ता सूचकांक) 200 से नीचे रहना चाहिए और यदि यह बढ़ जाता है तो पीएम 2.5 और पीएम 10 बढ़ता है जो खतरनाक रहता है। धुंध के दिनों में तो यह और भी खतरनाक हो जाता है। इससे बचने का तुरंत उपाय मास्क है लेकिन यदि इसे हमेशा के लिए मिलकर खत्म करें तो राहत मिल सकती है।
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-प्रो. डॉ. सुरेश देसवाल, पर्यावरणविद, अंबाला।
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प्रदूषण का स्तर जितना बढ़ेगा, उतना ही खतरा लोगों की सेहत पर पड़ेगा। सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। इससे हृदय रोग, सांस संबंधी परेशानियों से लेकर कैंसर तक की संभावनाएं हैं।
-डॉ. डीएस गोयल, एमडी मेडिसन एवं प्रधान आईएमए अंबाला कैंट चैप्टर।
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ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को मास्क दिए जाते हैं ताकि प्रदूषण से बचे रहें। निर्देश दिए जाएंगे कि इसका इस्तेमाल करें।
-सुल्तान सिंह, डीएसपी ट्रैफिक अंबाला।
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