हरियाणा के लोगों पर 6500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ना तय है। यह अलग बात है कि 22 फरवरी से शुरू होने वाले हरियाणा विधानसभा सत्र में बजट में कोई टैक्स न लगाया जाए। हर साल सरकार बजट में कोई टैक्स नहीं लगाती है।
हरियाणा के उत्तर और दक्षिण बिजली वितरण निगमों ने बिजली नियामक आयोग के पास 5500 करोड़ रुपये का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए आवेदन किया है। इसका फैसला 31 मार्च तक हो जाएगा। राजस्व विभाग ने भी एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें स्टांप ड्यूटी की शर्तों में बदलाव कर 1000 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को मिलेगा।
बिजली निगमों ने 2011-12 के लिए 3000 करोड़ रुपये का फ्यूल सरचार्ज एरियर (एफएसए) वसूलने के लिए आवेदन कर रखा है। यह एफएसए महंगी बिजली खरीदने के बदले वसूला जाता है। कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और निगमों की संपत्ति (रेगुलेटरी असेट) पर खर्च किए 2500 करोड़ रुपये का बोझ भी उपभोक्ताओं पर डालने का आवेदन किया है।
अगर एक साल में यह राशि वसूली जाए तो 1.71 रुपये प्रति यूनिट का बोझ बनता है। उपभोक्ताओं पर एक साथ इतना बोझ न पड़े इसलिए तीन वर्षों में यह बोझ बांटने के लिए 75 पैसे प्रति बोझ डालने को कहा गया है। इसके अलावा 2200 करोड़ रुपये का कर्ज दोनों निगम लेंगे। उसके ब्याज की वसूली अगले सालों में उपभोक्ताओं पर डाली जाएगी। चालू वित्त वर्ष में एफएसए साथ के साथ वसूला जा रहा है। एक साल में यह करीब 900 करोड़ रुपये बनता है।
राजस्व विभाग ने रिसोर्स मोबाइलाइजेशन कमेटी की बैठक में फैसले के अनुसार हुडा के प्लाटों के ट्रांसफर, कंपनियों की जमीन पर और कुछ अन्य तरीके अपनाकर 1000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास मंजूरी के लिए भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद यह लागू होगा।