हरियाणा के 16 जिले भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील घोषित किए गए हैं। इनके जल्द ही डिजिटल नक्शे तैयार किए जाएंगे।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन के अतिरिक्त मुख्य सचिव कृष्ण मोहन ने बताया कि सर्वेक्षण के आधार पर 16 जिलों पलवल, फरीदाबाद, गुड़गांव, मेवात, रेवाड़ी, नारनौल, झज्जर रोहतक, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, युमनानगर, अंबाला, पंचकूला, सोनीपत, भिवानी को भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील मानते हुए जोन चार में शामिल किया गया है।
बाढ़ की दृष्टि से यमुना नदी के साथ लगते हुए कुरुक्षेत्र पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, पलवल जिले शामिल किए गए हैं।
घग्गर, मारकंडा टांगरी नदियों के साथ लगते अंबाला, कैथल, जींद, फतेहाबाद और सिरसा जिले बाढ़ के खतरे वाले जोन में शामिल किए गए हैं।
भूकंप की दृष्टि में सिरसा को जोन नंबर दो में रखा गया है। सिरसा जिलें बाढ़, आगजनी, भूकंप, बम ब्लास्ट और भगदड़ जैसी आपदाओं की श्रेणी में है। इन जिलों में संसाधनों का ब्योरा इकट्ठा कर लिया गया है और जल्द ही माकड्रिल की जाएंगी।
कृष्ण मोहन ने बताया कि नौ जिलों सिरसा, कैथल, जींद, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, गुड़गांव, हिसार, रेवाड़ी और पलवल जिलों के लिए हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान गुड़गांव की मदद से आपदा प्रबंधन योजना तैयार की गई हैं।
उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन बारे में लोगों को नुक्कड़ नाटकों, वीडियो, फिल्मों, डिस्पले बोर्डों, दीवारों पर पेंटिंग, सूचना, शिक्षा एवं जनसंचार गतिविधियों के जरिए जागरूक किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सभी आयुक्तों, जिला उपायुक्तों को पैसे उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
मंडल स्तर पर दस-दस लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है।
इस अभियान के तहत लोगों को अलग-अलग आपदाओं और उनसे निपटने, तैयार रहने की जानकारी दी जाएगी।
बाजारों, स्कूलों, कालेजों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर नुक्कड़ नाटक कराए जाएंगे। सिनेमा हालों में वीडियो, केबल नेटवर्क के जरिए वीडियो क्लीपिंग दिखाई जाएंगी।
कृष्ण मोहन ने बताया कि सिटी प्लान, लघु सचिवालय सुरक्षा योजना, स्कूल सुरक्षा योजना, कचहरी परिसर सुरक्षा योजना, अस्पताल सुरक्षा योजना की आपदा प्रबंधन तैयार की गई।
प्रथम चरण में स्कूल सुरक्षा योजना के तहत हर जिले के 200 स्कूलों को शामिल किया जाएगा।
यह योजना चरखी दादरी और डबवाली अग्निकांड के अध्ययन के बाद तैयार की गई है।
इसके अलावा 13वें वित्त आयोग में आपदा प्रबंधन के लिए प्रदेश को पांच करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश सरकार ने भी आपदा राहत कोष बनाया हुआ है।