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महेंद्रगढ़ के बखरीजा पहाड़ की सबसे ज्यादा 130 करोड़ बोली

Mon, 30 Dec 2013 09:46 PM IST
भिवानी/ब्यूरो
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हरियाणा के जिला भिवानी में भिवानी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिले की पत्थर खदानों की नीलामी सोमवार को हुई। बोली में देशभर से 17 माइनिंग कंपनियों ने हिस्सा लिया।
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स्थानीय लघु सचिवालय परिसर में अतिरिक्त उपायुक्त सुजान सिंह की अध्यक्षता में नीलामी प्रक्रिया पूरी हुई। भिवानी जिले के कलाली, कलियाणा, खेड़ी बत्तर, मेहड़ा, अटेलाकलां, पिचोपाकलां व डाडम के लिए बोली करवाई गई।

जिला महेंद्रगढ़ के नारनौल, बखरीजा, अमरपुर जौरासी, उसमापुर, राजावास के पहाड़ों में खनन के लिए बोली हुई। इसके बाद रेवाड़ी जिले के माजरा, मनेठी पहाड़ों के लिए माइनिंग कंपनियों ने आरक्षित मूल्य से बढ़कर बोली लगी।
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13 में से 8 पहाड़ खदानों की बोली प्रक्रिया में प्लॉट नंबर एक कलाली और कलियाणा पहाड़ की बोली 32 करोड़ 45 लाख, कलियाणा प्लाट नंबर दो की बोली 36 करोड़, प्लॉट नंबर तीन खेड़ीबत्तर और मेहड़ा की नीलामी 87 करोड़ रुपये में छूटी।

अटेेलाकलां का पहाड़ 16 करोड़ 60 लाख रुपये, पिचोपाकलां प्लॉट नंबर एक 26 करोड़, पिचोपाकलां प्लॉट नंबर दो 23 करोड़ 50 लाख रुपये और डाडम की बोली 115 करोड़ रुपये लगाई गई।

महेंद्रगढ़ जिले के बखरीजा क्षेत्र की पहाड़ खदानों को सबसे ज्यादा 130 करोड़ रुपये की बोली पर छोड़ा गया। इस अवसर पर स्टेट माइनिंग इंजीनियर प्रवेश कुमार शर्मा, पुलिस उपाधीक्षक अमित भाटिया, उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त डीएस दहिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
 
उधर, बोली प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए पुलिस अमला तैनात किया गया था। पुलिस उपाधीक्षक अमित भाटिया समेत अन्य अधिकारियों के अलावा पूरी पूरा स्थिति पर नजर बनाए रखा।

विवादित क्षेत्र की बोली पर अधिकारी मौन
डाडम पहाड़ में 15 हेक्टेयर एरिया पर वन विभाग और खनन विभाग के बीच चली रस्साकस्सी में खनन विभाग ने आखिरकार चार हेक्टेयर छोड़कर बोली लगा ही दी।

वन विभाग के 11 हेक्टेयर के दावे पर खनन विभाग द्वारा बोली लगाने के कारणों पर अधिकारी फिलहाल मौन रहे, जबकि दो दिन पहले तक विवाद जारी था।

करीब चार साल से बंद खनन पर रोक हटने के बाद खनन विभाग ने माइनिंग कराने की तैयारी की है। खनन विभाग के नोटिफिकेशन के बाद सोमवार को डाडम पहाडी के 55.50 हेक्टेयर पहाड़ की बोली 115 करोड़ में छूटी।

जारी नोटिफिकेशन में 59.60 हेक्टेयर एरिया दिया गया था, जिस पर दोनों विभागों में विवाद हो गया था। इसमें से 15 हेक्टेयर पर वन विभाग अपना दावा जता रहा था। सोमवार को 55.50 हेक्टेयर की बोली कर दी गई है।

डाडम पहाड़ पर पांच दिसंबर को विवाद तब सामने आया, जब डीसी सहित जिले के अन्य अधिकारी और वन विभाग अफसर चंडीगढ़ से पहाड़ पर पहुंचे। नोटिफिकेशन में खनन के लिए डाडम पहाड़ का 59.60 हेक्टेयर हिस्सा अधिकृत किया गया है।

नोटिफिकेशन के बाद दोनों विभाग के अधिकारी अपने-अपने हिस्से को लेकर सक्रिय हुए। वन विभाग ने डाडम पहाड़ी में खनन विभाग का 32 हेक्टेयर बताया और अपना हिस्सा 47 हेक्टेयर है।

पांच दिसंबर को डीसी समेत कई अधिकारियों ने मौका मुआयना कर स्थिति का जायजा लिया था। इसके बाद 6-7 दिसंबर को भी वन विभाग व खनन विभाग की टीम विवाद को निपटाने के लिए दिनभर पहाड़ी में पत्थरों को नापते रहे।

इसी दौरान डीसी ने एडीसी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई। दोनों विभागों में तीन-तीन दौर की मीटिंग होने के बावजूद मामला ज्यों का त्यों बना रहा। इसके बाद चंडीगढ़ में हुई मीटिंग में विभागों के वित्तायुक्त एवं सचिव समेत कई अधिकारी थे।

जिले से डीसी-एडीसी थे। कोई निष्कर्ष नहीं निकलने के बाद पांच शीर्ष अधिकारियों की कमेटी बनाई गई। कमेटी में डीसी व एडीसी को भी शामिल किया गया।

इसके बाद अतिरिक्त उपायुक्त सुजान सिंह, माईनिंग इंजीनियर पीके शर्मा, चंडीगढ से कंजरवेटर डी हेंब्रम व विनोद झाझडिया के अलावा एसडीम अजय चोपडा, जिला खनन अधिकारी राजेंद्र यादव, डीएफओ आरके भाटिया, बीडीपीओ सीताराम आदि अधिकारी डाडम पहाड़ी में पंहुचे और देर सायं तक पहाड़ के नापतोल में लगे रहे।

पिछले शुक्रवार को एक बार फिर चंडीगढ के आला अधिकारी डाडम पहाड़ी में पंहुचे। चंडीगढ़ से पंहुचे अतिरिक्त पीसीसीएफ आरके सपरा ने पहाड़ी का मुआयना किया।

जिला वन अधिकारी आरके भाटिया से जब एरिया घटाने के कारणों की बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामला उच्च अधिकारियों के पास था। इस पर क्या सहमति बनी मेरी जानकारी में नहीं है।
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