हरियाणा में पंजाबी, ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत और अन्य उन जातियों के गरीब लोगों को 10 फीसदी आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाएगा जो किसी भी आरक्षित श्रेणी में शामिल नहीं हैं। यह फैसला हरियाणा मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में लिया गया है।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और संसदीय कार्य मंत्री रणदीप सुरजेवाला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मंत्रिमंडल की उपसमिति वित्त मंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा की अध्यक्षता में गठित हुई थी। हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए सिफारिश 22 जनवरी को भेजी जिस पर उपसमिति ने विचार किया। उपसमिति की सिफारिशों को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी।
उन्होंने बताया कि जिस परिवार की सालाना आय ढाई लाख रुपये तक होगी उनको आर्थिक आधार पर आरक्षण मिलेगा। ‘परिवार’ का अभिप्राय परिवार का मुखिया, उसका पति या पत्नी, अविवाहित पुत्र या अविवाहित पुत्री, आवेदक, उसका पति या पत्नी, आश्रित माता-पिता या आश्रित बच्चे, अविवाहित आश्रित भाई या अविवाहित आश्रित बहनें, परिवार के मुखिया या आवेदक पर आश्रित कोई अन्य व्यक्ति होगा।
इनको नहीं मिलेगा लाभ
परिवार के किसी भी सदस्य के इनकम टैक्स अदा करने वाले को आरक्षण नहीं मिलेगा। क्लास एक और दो के अधिकारियों और पब्लिक सेक्टर या प्राइवेट सेक्टर में क्लास एक और दो के समकक्ष पद वाले परिवार को भी आरक्षण नहीं मिलेगा। डॉक्टर, एडवोकेट, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट, कंप्यूटर विशेषज्ञ, फिल्म या टीवी कलाकार, नाटक लेखक, लेखक, माडल, मीडिया कर्मी या विधान के तहत निर्वाचित कोई व्यक्ति वाले परिवार को भी आरक्षण नहीं मिलेगा।
सेना में सेकंड लेफ्टिनेंट या उच्च पदों पर तैनात व्यक्ति के परिवार को भी यह लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही प्रदेश में अब कुल आरक्षण 67 फीसदी हो जाएगा जिसमें अनुसूचित जाति के लिए 20 फीसदी, पिछड़ी श्रेणी के लिए 27, जाट, जट सिख, रोड, बिश्नोई और त्यागी के लिए 10 फीसदी और अन्य जातियों के लिए आर्थिक आधार पर 10 फीसदी शामिल है।