ऐसे में टीम ने निर्णय लिया कि गोरखपुर चिड़ियाघर से एक जू कीपर भेजकर जेब्रा को उसके साथ सहज किया जाए। चिड़ियाघर प्रबंधन का मानना है कि इंसानों को देखकर सहज रहने के बाद ही जेब्रा को गोरखपुर चिड़ियाघर में लाया जाना उचित होगा। क्योंकि, यहां लाए जाने के बाद करीब तीस मीटर दूरी से रोजाना उसे सैकड़ों लोग देखेंगे। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि जेब्रा के साथ जू कीपर की दोस्ती ही उसे गोरखपुर लाने में सहायक होगी।
छह में से एक जेब्रा की हो गई थी मौत
बीते नवंबर में इजराइल से छह जेब्रा लखनऊ चिड़ियाघर लाए गए थे। उनमें से एक की 36 घंटे बाद ही मौत हो गई थी। इसके बाद से चिड़ियाघर प्रशासन जेब्रा को लेकर बेहद सावधानी बरत रहा है। जेब्रा का बाड़ा पहले गोरखपुर चिड़ियाघर में शेर के बगल में बनाया गया था। अब शेर के बाड़े से करीब 500 मीटर की दूरी पर जेब्रा का बाड़ा बनाया गया है।