महज छह साल की उम्र में गोल्फ स्टिक थामने वाली गोरखपुर शहर की युवा गोल्फर दीक्षा का सपना देश के लिए गोल्फ में पदक हासिल करने का है। भले ही वह टोक्यो ओलंपिक में पदक हासिल करने से चूक गईं मगर निराश होने के बजाय अब दोगुने उत्साह के साथ अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर स्थित गोल्फ कोर्स में जुटी हैं। उनका लक्ष्य फिलहाल एशियन गेम्स में देश को पदक दिलाने पर है।
अमर उजाला से बातचीत दीक्षा ने बताया कि यह खेल उन्हें अपने पिता कर्नल नरेंद्र डागर से विरासत में मिला है। बचपन से लेकर आज तक पिता ही अभिभावक से लेकर कोच तक की कमान संभालते हैं। उन्हीं के निर्देशन में गोल्फ की स्टिक पकड़ी तो टोक्यो ओलंपिक तक पहुंच गई। हालांकि पदक से चूकने वाली 21 वर्षीय दीक्षा का अब अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में गोल्ड है।
वर्ष 2019 में दक्षिण अफ्रीकी ओपन में महिला ओपेन जीतने वाली दीक्षा सबसे कम उम्र की महिला गोल्फर और अदिति अशोक के बाद दूसरी भारतीय महिला बनीं। उन्होंने 18 साल की उम्र में ये कारनामा किया। उसी समय वह ओलंपिक का टिकट कटाया।
उन्होंने बताया कि मार्च 2022 में वह एक बार फिर वह दक्षिण अफ्रीकी महिला ओपेन टूर्नामेंट खेलने जा रहीं हैं और इस बार उन्हें जीत की उम्मीद है। वह बताती हैं कि अभ्यास के दौरान मुझे गोरखपुर में एक अच्छा माहौल मिला। यहां मुझे वह सारी सुविधाएं मिलीं तो एक अच्छे गोल्फ कोर्स में उपलब्ध होती हैं। गोल्फ क्लब के सचिव डीके खरे का हमारे अभ्यास में विशेष योगदान है।