कोरोना की तीसरी लहर भी आ गई और बिजली निगम के दफ्तरों में ई-फाइलिंग व्यवस्था अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। शासन की गाइडलाइंस के मुताबिक सरकारी कार्यालयों में 50 फीसदी कर्मचारियों को घर से काम करना है। लेकिन, बिजली निगम के दफ्तरों में सैकड़ों फाइलों के बीच काम करने वाले ये कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कैसे करेंगे, यह बड़ा प्रश्न है।
मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता कार्यालय से लेकर खंड और उपखंड कार्यालय पर अभी विभागीय काम ई-फाइलिंग की व्यवस्था नहीं है। वहीं, स्टोर का काम ईआरपी पोर्टल से हो गया। मतलब, अगर पोल, तार, इंसुलेटर और अन्य बिजली के उपकरण ठेकेदार या अभियंता चाहे तो वह ऑनलाइन आवेदन कर, ले सकता है। खंडवार अभियंता अपने क्षेत्र के ठेकेदारों के काम का ब्योरा ईआरपी पर अपलोड कर देंगे, लेकिन प्रतिदिन विभागों में हजारों पन्ने उलटने-पलटने वाले बाबुओं को आज भी कागजों पर ही काम करना पड़ रहा है।
बिजली निगम ने नए कनेक्शनों के लिए ऑनलाइन आवेदन का इंतजाम किया है। लेकिन, यह व्यवस्था भी हवा-हवाई ही साबित हो रही है। आवेदन करने के बाद उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र के अवर अभियंता, बाबू, लाइन मैन और मीटर खंड में जाकर परामर्श करना होता है। उनकी परामर्श शर्तों पर खरा उतरने के बाद ही उनका आवेदन स्वीकृत होकर, घर कर कनेक्शन जोड़ा जा सकता। उदाहरण, पादरी बाजार क्षेत्र के एक उपभोक्ता ने 27 दिसंबर को कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया था। चार दिन तक आवेदन वैसे ही लंबित था। क्षेत्र के अवर अभियंता से उपभोक्ता ने संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी नहीं मिलता है। 14 दिन लगते हैं।
मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि ई-फाइलिंग की व्यवस्था लागू न हो पाने से वर्क फ्रॉम होम में काम प्रभावित होता है। इसके बावजूद कोरोना की पिछली दोनों लहरों में वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू की गई थी। इस बार भी आदेश मिल गया है, इसे लागू किया जाएगा। स्टोर और ठेकेदारों का काम ऑनलाइन हो गया है। उपभोक्ताओं को ऑनलाइन ही कनेक्शन के लिए आवेदन करना है। अगर आवेदन स्वीकृत नहीं होता और उन्हें कार्यालय पर जाकर या किसी से संपर्क करना पड़ता है तो यह गंभीर है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।