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UP: सनातन धर्म व चारों वेदों का निचोड़ है योगानंद के क्रिया योग की शिक्षा, अमेरिका से आए स्वामी विश्वानंद गिरी

Tue, 06 Jan 2026 02:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो राजन राय, गोरखपुर

सार

योगगुरु परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती पर गोरखपुर स्थित उनकी जन्मस्थली पर आयोजित जयंती समारोह में अमेरिका से योगगुरु की विदेश की संस्था सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप के उपाध्यक्ष स्वामी विश्वानंद गिरि आए थे। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में योगगुरु योगानंद के क्रिया योग की महत्ता पर खुलकर बातचीत की।
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योगगुरु परमहंस योगानंद जी की 133वीं जयंती - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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योगगुरु परमहंस योगानंद ने पूरी दुनिया में क्रिया योग की शिक्षाएं दीं। यह सनातन धर्म और चारों वेदों का निचोड़ है। 1920 में जब वह अमेरिका गए तो उन्हें वहां कई चुनौतियां झेलनी पड़ीं। उनकी शिक्षा को संदेह के आधार पर देखा गया। आध्यात्मिक शक्तियों को वैज्ञानिक पद्धति से परखा गया।

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धीरे-धीरे लोगों ने उनकी शक्ति को महसूस किया और फिर जुड़ते चले गए। आज विश्व में लाखों लोग उनकी शिक्षा को आत्मसात कर रहे हैं। वर्तमान समय में तनाव भरी जिंदगी में शांति का सबसे उपयुक्त मार्ग योगगुरु की शिक्षा ही है।

योगगुरु परमहंस योगानंद जी की 133वीं जयंती के अवसर पर गोरखपुर में निकाली गयी भव्य शोभायात्रा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
योगगुरु परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती पर गोरखपुर स्थित उनकी जन्मस्थली पर आयोजित जयंती समारोह में अमेरिका से योगगुरु की विदेश की संस्था सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप के उपाध्यक्ष स्वामी विश्वानंद गिरि आए थे। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में योगगुरु योगानंद के क्रिया योग की महत्ता पर खुलकर बातचीत की।

कहा कि पहले तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति पूरे विश्व में रह रहे योगगुरु के अनुयायियों की तरफ से धन्यवाद देते हैं कि एक योगी ने एक योगी की जन्मस्थली को संवारने का बीड़ा उठाया। स्वामी विश्वानंद गिरि ने बताया कि 57 वर्ष पहले उनके एक मित्र ने योगगुरु योगानंद की ऑटोबायोग्राफी योगी कथामृत दी।

योगगुरु परमहंस योगानंद जी की 133वीं जयंती के अवसर पर गोरखपुर में निकाली गयी भव्य शोभायात्रा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उसे पढ़ने के बाद महसूस किया कि ध्यान कर ईश्वर से जुड़ने का इससे बेहतर माध्यम और नहीं है। उनकी शिक्षा हृदय और आत्मा दोनों को छूती है।इसके बाद मुड़कर नहीं देखा और उनकी संस्था से जुड़कर काम करने लगा। वह दूसरी बार गोरखपुर आए हैं।

उन्होंने कहा कि जब वह गोरखनाथ मंदिर गए तो वहां आध्यामिक शक्ति का अहसास हुआ। तब लगा कि सात-आठ साल की उम्र में ध्यान लगाने योगगुरु क्यों गोरखनाथ मंदिर चले जाते थे। स्वामी ने बताया कि विश्व में योगगुरु की संस्था के 800 और देश में 200 केंद्र हैं।
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योगगुरु परमहंस योगानंद जी की 133वीं जयंती के अवसर पर गोरखपुर में निकाली गयी भव्य शोभायात्रा  ।स
गुरुजी एक ऐसे रत्न जिसकी कोई कीमत नहीं
स्वामी विश्वानंद गिरि ने कांचीपुरम के शंकराचार्य से काशी में योगगुरु परमहंस योगानंद की हुई मुलाकात का जिक्र किया। बताया कि शंकराचार्य ने भी कहा था कि विश्व में छाई अज्ञानता के लिए योगगुरु एक प्रकाश पुंज हैं। ऐसे दुर्लभ लोग कभी-कभी जन्म लेते हैं। वह ऐसे रत्न हैं जिसकी कोई कीमत नहीं है। स्वामी ने कहा कि गुरुजी की शक्ति को अभी पूरा विश्व जान नहीं पाया है।

शरीर व आत्मा दोनों पवित्र हों..यूथ को ऐसी शिक्षा देना चाहते थे
योगगुरु यूथ को एक अच्छी शिक्षा देना चाहते थे। ऐसा स्कूल या संस्था हो जहां यह बताया जाए कि जीवन कैसे जीना है। शिक्षा के साथ शरीर और आत्मा दोनों पवित्र हो सकें। स्कूल में 100 बच्चे रह सकते थे लेकिन एक साल बाद ही 2000 बच्चे दाखिला लेने के लिए आए।
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