धारा 315 आईपीसी : शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के पश्चात मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य।
सजा : दस वर्ष तक कारावास और आर्थिक दंड
धारा 317 आईपीसी : माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।
सजा : सात साल की कैद या फिर जुर्माना या फिर दोनों
धारा 318 आईपीसी : नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित अथवा मृत फेंकना अपराध है।
सजा : दो साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों।
इसे भी पढ़ें: दिव्यांग सफाईकर्मी की पुत्री का सीएम योगी ने कराया अन्नप्राशन, अपने हाथों से खिलाई खीर
कथित लोकलाज से बचने के लिए नवजात को मौत के घाट उतारने का कुकृत्य हमारे समाज में आदिकाल से होता चला आ रहा है। ऐसे ही एक नवजात पीपीगंज इलाके में मिला था। मामले में 31 जनवरी 2020 को दर्ज इस मामले की तफ्तीश कैंपियरगंज थाना पुलिस ने की थी। इस मामले में एक प्रभावशाली परिवार के युवक ने एक नाबालिग को हवस का शिकार बनाया था। उससे एक बच्चे का जन्म हुआ।
बिन ब्याही किशोरी मां और उसकी मां ने नवजात को मारकर फेंक दिया था। अमर उजाला की पड़ताल पर सक्रिय हुई पुलिस ने दुष्कर्म के आरोपी, नवजात को मौत के घाट उतारने वाली किशोरी मां और किशोरी की मां को हत्या के आरोप में 24 फरवरी 2020 को गिरफ्तार किया था।
बड़हलगंज में भी हुई थी नवजात की हत्या
5 जनवरी 2022 को बड़हलगंज पुलिस ने नवजात का शव मिलने पर केस दर्ज किया था। जांच में पता चला कि एक युवती बिन ब्याही मां बनी थी। पुलिस ने इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या और दुष्कर्म की धारा को बढ़ा दिया था। बाद में पता चला कि बिन ब्याही मां की मां ने ही पटककर नवजात को मारा था। पुलिस ने प्रेमी को दुष्कर्म और मां-बेटी को हत्या के आरोप में जेल भेजा था।