सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि आमतौर पर 0.25 प्रतिशत कुत्ते ही रैपिड होते हैं, जिनके काटने से रैबीज होता है। पालतू कुत्तों के काटने से रैबीज की आशंका न के बराबर होती है, क्योंकि पालतू कुत्तों को लोग पहले ही एंटी रैबीज वैक्सीन लगवा देते हैं।
कुत्ते के काटने पर वैक्सीन जरूर लगवाएं
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि यदि किसी को कुत्ते ने काट लिया है और वह एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाता है तो वह अपनी जान से खेल रहा होता है। उन्होंने बताया कि कुत्तों के काटने का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता है। जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे शरीर में संक्रमण बढ़ता जाता है। ऐसे में मरीज के शरीर में क्या परिवर्तन हो जाए यह किसी को नहीं पता। इसलिए कुत्ते के काटने पर तत्काल एआरवी जरूर लगवाएं।
भूख और प्यास से बेहाल कुत्ते लॉकडाउन में अधिक आक्रामक हो गए थे। अनलॉक में कुत्तों के व्यवहार में फिर बदलाव देखने को मिल रहा है। कुत्ते अब ज्यादा खतरनाक नहीं रह गए हैं। अनलॉक में रोजाना करीब 150 मरीज वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं, जबकि लॉकडाउन के दौरान यह संख्या 200 के आसपास थी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि अनलॉक में सब कुछ खुल गया है। ऐसे में अब कुत्तों को खाना-पीना मिलना शुरू हो गया है। रेस्टोरेंट, होटल और स्ट्रीट फूड की दुकानें खुल गई हैं। गली-मोहल्लों के आवारा कुत्तों को अब खाना मिल जा रहा है। यही वजह है कि अब कुत्तों के व्यवहार में बदलाव आ गया है। जिला अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि अब कुत्ते ज्यादा आक्रामक नहीं हर गए हैं। शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज ज्यादा आ रहे हैं।