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Gorakhpur News: गांव छोड़ने को महिलाएं तैयार नहीं, बोलीं- बेटियों को लेकर नहीं रह सकती सड़क पर

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हाल ज्ञानकोल और बगहा देवार गांव का: नाव का सहारा लेकर जरूरी काम व सामान लेने सड़क तक आ-जा रहे हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानकोल। बड़हलगंज ब्लॉक का ज्ञानकोल गांव पानी से घिर चुका है। प्राथमिक विद्यालय में डरे-सहमे बच्चे, फर्राटा लेकर नाव पर चढ़ रहीं महिलाएं..., रविवार को यहां का नजारा कुछ ऐसा था। चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी। ये बताने के लिए काफी है कि यहां के लोग इस वक्त किस कदर परेशानियों से जूझ रहे हैं। रविवार को नाव में सवार होकर टीम जब ज्ञानकोल गांव पहुंची तो महिलाओं का दर्द छलक पड़ा। एक महिला ने कहा कि वह बेटी-बहू को लेकर सड़क पर तो नहीं रह सकती है।
पानी से घिरे गांव वालों को सड़क तक आने-जाने के लिए एक छोटी सी नाव लगाई गई है। जब नाविक से टीम ने सवाल किया कि नाव इतनी छोटी क्यों है? उसने बताया कि यह नाव कम पानी में भी आ-जा सकती है। उस पर सवार होकर लोग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए सड़क तक आते जाते हैं। ज्ञानकोल गांव के पास 10 महिलाएं नाव में सवार हो रहीं थीं। एक महिला के हाथ में फर्राटा (पंखा) था। उन्होंने बताया कि वह पंखा ठीक कराने नहीं बल्कि सड़क के पास रह रहे परिवार के लोगों के लिए लेकर जा रही है। महिला का कहना था कि पंखा नहीं है और गर्मी ज्यादा है।
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ग्रामीण बोले- सड़क ऊंची करवाने को कह रहे, पर कोई नहीं सुना रहा
रामजानकी मार्ग से ज्ञानकोल गांव जाने के लिए लगभग 500 मीटर लंबी पक्की सड़क है लेकिन उस पर जलभराव है। गांव के प्रवीन यादव, सर्वजीत यादव, रामजीत यादव का कहना है कि उन लोगों ने नेताओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कहा कि यदि कुछ कर सकते हैं तो इस सड़क को ऊंचा करा दें। आधी समस्या समाप्त हो जाएगी लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। पानी भरने पर नाव का सहारा लेना पड़ता है।


शिकायत: जहां डूबने का खतरा वहीं दे रहे जमीन
गांव के वंशी यादव, मोहन यादव, रमाकांत, सूर्यभान, जयप्रकाश, जर्नादन, अशोक, धर्मेंद्र, फूलचंद, राजेंद्र, अरविंद और प्रमोद का मकान बीते वर्षों में कटान के चलते नदी में विलीन हो चुका है। प्रशासन की ओर से उन लोगों को जमीन देकर दूसरी जगह बसाने की बात कही गई है। ग्रामीणों ने बताया कि बरडीहा गांव में जमीन देने की बात हो रही है। वहां जाकर क्या करेंगे, वह जमीन लो लैंड है और वहां भी कटान हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें पटना गांव के समीप कहीं जमीन दी जाए। गांव वालों ने कहा कि जब तक जमीन नहीं दी जा रही है, तब तक हीं और रहने के लिए घर बनवा कर दे दें।
दर्द यह भी है....यहां आकर हालात देखें
ज्ञानकोल गांव के वंशी यादव का घर कट गया है। वह दूसरे के खेत में छप्पर डालकर अपने जानवर रखे हुए हैं। वहीं जानवरों को भूसा और चारा दे रहे हैं। चारों तरफ पानी से घिरा है लेकिन जहां पशु हैं वहां पानी नहीं है। वे कहते हैं कि जहां जानवरों को रखा है वह जगह गांव से दो सौ मीटर की दूरी पर है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जब गांव पहुंची तो लोग एकत्रित हो गए। वंशी के घर की बिटिया उनके पास जा रही थी। भीड़ देखकर उसने पूछा कि कौन आया है। किसी ने कहा कि मीडिया वाले आए हैं। उसने चिल्लाकर कहा, साहब लोग यहां आइए, नजदीक आकर बाढ़ का नजारा देखिए। अफसरों से भी कहिए कि बाहर से न जाएं हमारे यहां आकर हालात देखें।

पानी से घिरा बगहा देवार, डर लगता है बच्चे पानी में न चले जाएं
टीम बगहा देवार पहुंची। यहां करीब दो सौ घर हैं। राम जानकी मार्ग से दो किलोमीटर की दूरी पर बसा यह गांव चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है। गांव तक जाने के लिए दो नाव लगाई गई हैं। गांव वाले उन्हीं नावों से आ-जा रहे हैं। रविवार को प्रशासन की ओर राशन का पैकेट वितरित किया जा रहा था। बहुत से गांव वाले राशन का पैकेट लेकर ऑटो से सड़क तक आ रहे थे। उसे नाव पर रखकर गांव ले जा रहे थे। उन्हीं लोगों में से दो महिलाएं लीलावती देवी व लीला ने बताया कि बाढ़ की वजह से परेशानी है। वह लोग झोपड़ी में बच्चों को लेकर बैठे हैं। डर लगता है कि बच्चे कहीं पानी में न चले जाएं।
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जितना पैसा घर बचाने के लिए खर्च करते हैं, उतने में पूरा गांव बस जाता
ज्ञानकोल गांव में जो घर बचे हैं उन्हें बचाने के लिए गांव के किनारे सिंचाई विभाग की तरफ से बोल्डर-पिचिंग कराया गया है। मुन्नी और पार्वती से जब पानी के बीच में दिख रही भरी बोरियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि नदी के किनारे कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से बोरियां रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि जितना पैसा घर बचाने के लिए खर्च होता है उतने पैसे से दूसरी जगह पूरा गांव बस जाता।
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