इधर, पति उसकी तलाश कर परेशान थे। उधर, महिला नदी में बहते हुए करीब 45 किलोमीटर दूर देवरिया के रूद्रपुर स्थित पिड़रा घाट के पास पहुंच गईं। पिड़रा घाट के आसपास के लोगों ने उसे पानी में बहते हुए देखा और नदी में बाहर निकाला।
महिला को पानी में जिंदा देखकर आसपास के गांव के लोग जुट गए। तभी, पिड़रा घाट के पास स्थित पचलड़ी गांव निवासी अतरवासी देवी ने महिला को पहचान लिया। अतरवासी ने अपने गांव के प्रधान देवी प्रसाद को बताया कि बह कर आई महिला झंगहा के राजधानी स्थित उसके मायके की है।
इसे भी पढ़ें- गोरखपुर शहर में मौत को दावत दे रहे हैं लोग, सात दिन में बने 70 कोरोना हॉटस्पॉट
ग्राम प्रधान देवी प्रसाद नगीना देवी को साथ लेकर गुरुवार को राजधानी गांव पहुंचे और उसे उसके पति को सौंप दिया। पत्नी को देखते ही पति के खुशी का ठिकाना ही नही रहा। महिला को देखने के लिए राजबली के घर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई।
महिला बिल्कुल सुरक्षित और अपने परिवार में है। नगीना देवी ने बताया कि नदी में बहते समय उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। उसने बताया कि पानी से बाहर निकलने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाई। वह तैरना भी नहीं जानती है।
इसे भी पढ़ें- विकास दुबे एनकाउंटर के बाद बदमाशों में छाया ऐसा खौफ, सख्ती से पहले ही कर दे रहे सरेंडर
जैसा महिला बता रही है कि उसके मुंह में जैसे ही पानी जाता था, उसे उल्टी होने लगती थी। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अखिलेश सिंह का कहना है कि इसी प्रक्रिया ने महिला की जान बचाई। दरअसल, पानी में डूबने वाले व्यक्ति के फेफड़ों में जब पानी भर जाता है तो वह पानी में डूब जाता है और ऑक्सीजन के अभाव में थोड़ी देर में ही दम तोड़ देता है। इस मामले में ज्योंहि पानी महिला के मुंह में जा रहा था, उसे उल्टी होने लगती थी, इस प्रक्रिया में संभव है कि पानी फेफड़ों में नहीं घुस सका और महिला की सांस चलती रही और उसे देवरिया में बचा लिया गया।