डॉक्टरों के मुताबिक, किसी भी आंख का इस्तेमाल मरने से छह घंटे के भीतर ही किया जा सकता है। इस प्रकरण में मृत अनुराधा के भाई का कहना है कि 31 दिसंबर की रात पुलिस का फोन आया था। अनजान नंबर से कॉल आई और बताया गया कि बहन ने पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली है। अगले दिन मेडिकल कॉलेज बुलाया गया, फिर पुलिस चौकी पर जाने को कहा गया। पंचनामा भरने से पहले शव दिखाया गया तो बहन की आंख गायब थी। तब पुलिस वालों ने चूहे से कुतरे होने की बात बताते हुए मामले को टाल दिया था।
पहले हुई घटनाएं
17 जनवरी 2019: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चाइल्ड लाइन कर्मचारी विवेक कुमार की खुदकुशी के बाद रखे शव के चेहरे को चूहों ने कुतर डाला था।
6 नवंबर 2018: जिला अस्पताल की मोर्चरी में सपा नेता बेचन प्रसाद चौरसिया का हादसे में मौत के बाद रखे शव को चूहों ने कुतर डाला था।
सील होने के बाद नहीं चलता पता
यह दोनों ही ऐसे मामले थे, जिसमें मोर्चरी में परिजन चले गए थे और पूरा मामला खुलकर सामने आ गया था। पोस्टमार्टम होता तो शव को पूरी तरह से सील कर दिया जाता। इसके बाद उसे खोला नहीं जाता है। इसकी हिदायत वहां के कर्मचारी भी देते हैं। ऐसे में मामला खुलकर सामने नहीं आ पाता है। सपा नेता का मामला हो या फिर चाइल्ड लाइन का ये मामला सिर्फ इस वजह से खुला था, क्योंकि पोस्टमार्टम से पहले शव के पास परिजन मोर्चरी में पहुंच गए थे।
गुलरिहा इंस्पेक्टर रवि राय ने कहा कि शव को सील कराते समय वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी दोनों ही कराई गई थी। आंख पूरी तरह से सुरक्षित थीं। आंख गायब होने की किसी ने शिकायत भी नहीं की है। इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।