पीड़ित विद्यावती देवी ने जनता दरबार में सीएम योगी से फरियाद की थी।
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मुख्यमंत्री जी, मैं जिंदा हूं। पति की जमीन में मेरा भी हक है। मुझे मृत घोषित कर बेटे ने जमीन को अपने नाम वरासत करा लिया है। राजस्व कर्मियों ने भी फर्जीवाड़े में पूरा सहयोग किया है। वरासत की प्रक्रिया में लेखपाल, कानूनगो द्वारा प्रमाणित कर जमीन बेटे के नाम चढ़ा दी गई। खतौनी में मेरा नाम नहीं है। बेटे ने जमीन भी बेच दी है।
यह कहना था बेलीपार इलाके के सोकनहा गांव की विधवा विद्यावती देवी का, जिन्होंने मंगलवार की सुबह जनता दर्शन में मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई। उनकी बातों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने जांच कराकर कार्रवाई का निर्देश दिया है। उनका कहना है कि वह तहसील प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगाते लगाते थक गई हैं। वरासत में नाम दर्ज कराने के लिए तहसील में प्रार्थना पत्र दी हैं, पर अब तक नाम अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया।
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बताया कि उनके पति का निधन बहुत पहले हो गया। 15 डिस्मिल जमीन थी। आरोप है कि विद्यावती के हिस्से की जमीन लेखपाल द्वारा उनके पुत्र के नाम दर्ज कर दिया गया। पुत्र से वह जमीन किसी और ने बैनामा भी करा लिया। रजिस्ट्री की गई जमीन के खारिज दाखिल रोकने के लिए उन्होंने तहसीलदार बांसगांव के न्यायालय में अपने जिंदा होने का साक्ष्य भी दिखाया। लेकिन, तहसीलदार बांसगांव द्वारा लेखपालों कानूगो की रिपोर्ट को सही मानते हुए मेरे ही खिलाफ आदेश जारी कर दिया गया।
डीएम कृष्णा करूणेश ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर महिला की शिकायत सही मिली तो जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।