Lord Buddha Mahaparinirvana
- फोटो : अमर उजाला।
देवदह में अब तक ये कार्य हुए
- राजमहल (ढाई एकड़) अवशेष को तारबाड़ से घेरकर सुरक्षित किया गया है
- राजमहल से मुख्य टीले तक 400 मीटर लंबा और 15 फीट चौड़ा कच्चा मार्ग
- देवदह में मुख्य आकर्षण का केंद्र पुषकर्णी (सगरा) का जीर्णोद्धार किया जा रहा है
- पेयजल के लिए तीन इंडिया मार्का हैंडपंप और 8 सोलर लाइटें लगाई गई हैं
फाह्यान ने भी किया है उल्लेख
चीनी यात्री फाह्यान ने अपने यात्रा विवरण में भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों की दूरियों का उल्लेख योजन में किया है। कनिंघम की गणनानुसार फाह्यान का एक योजन 6.71 मील के बराबर था। कपिलवस्तु से बर्डपुर, मोहाना, लोटन, कोल्हुई व एकसड़वा होते हुए लक्ष्मीपुर ब्लॉक स्थित बनरसिया (देवदह)की दूरी 53 किमी पूरब है। इसी प्रकार कपिलवस्तु से लुंबिनी, केवटलिया, बेतकुइयां, महदेवा (नेपाल), जोगियाबारी व एकसड़वा होते हुए बनरसिया की दूरी भी लगभग इतनी ही है। चीनी यात्री फाह्यान व ह्वेनसांग ने देवदह की दिशा कपिलवस्तु के पूरब बताई है। इस प्रकार दिशा और दूरी के आधार पर बनरसिया स्तूप ही देवदह साबित हुआ है।