गोरखपुर की पहचान गीता प्रेस।
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प्रेस मालिक ने एक दिन कहा कि इतनी शुद्ध गीता प्रकाशित करवानी है तो अपना प्रेस लगा लीजिए। गोयंदका ने इस कार्य के लिए गोरखपुर को चुना। 23 अप्रैल 1923 को उर्दू बाजार में 10 रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया गया और वहीं से शुरू हुआ गीता का प्रकाशन। धीरे-धीरे गीता प्रेस का निर्माण हुआ और इसकी वजह से पूरे विश्व में गोरखपुर को एक अलग पहचान मिली। आज प्रेस के पास दो लाख वर्ग फीट जमीन है। इसमें 1.45 लाख वर्ग फीट में प्रेस, कार्यालय व मशीनें हैं। 55 हजार वर्ग फीट में दुकानें व आवास हैं।