बॉस्टकेट बॉल कोर्ट को नौ साल से प्रशिक्षक की प्रतीक्षा
एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड की उखड़ चुकी हैं गिट्टियां, जिम्मेदार उदासीन
धन खपाने को 50 लाख की लागत से बनवाई कोर्ट, नहीं मिला प्रशिक्षक
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में करीब 50 लाख रुपये की लागत से वर्ष 2012 में बने बास्केट बॉल कोर्ट को नौ साल बाद भी प्रशिक्षक का इंतजार है। खेल निदेशालय ने केवल धन खपाने के उद्देश्य से यहां कोर्ट तो बनवा दी, लेकिन आज तक प्रशिक्षक की तैनाती नहीं हुई। कोर्ट बनी तो उम्मीद जगी कि यहां बास्केट बॉल खेल का स्तर ऊंचा होगा और जिले से बेहतर खिलाड़ी निकलेंगे। हालत यह है कि अब एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड उखड़ने लगा है।
नौ साल बाद अब इसकी मरम्मत का प्रस्ताव तैयार हो गया है। इस कोर्ट के लिए आज तक न तो प्रशिक्षक की तैनाती हुई और न ही इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए कोई गंभीर प्रयास हुआ। गोरखपुर के पूर्व क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी रहे अश्विनी कुमार सिंह ने बताया कि कुशल प्रशिक्षक की देखरेख में ही खेल व खिलाड़ी निखरते हैं। बिना कोच के किसी भी खेल व खिलाड़ियों को बेहतर बनाना संभव ही नहीं है। देश व प्रदेश स्तर पर हर खेलों में जितने भी खिलाड़ी आज नाम रोशन कर रहे हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान उनके प्रशिक्षकों एवं उसे प्रारंभिक स्तर पर मिली सुविधाओं एवं प्रशिक्षण का होता है।
खिलाड़ी बोले- प्रशिक्षक होते तो जिले से निकलते बेहतर खिलाड़ी
स्टेडियम में प्रतिदिन अभ्यास करने वाले रितिक तिवारी ने बताया कि बास्केट बॉल कोर्ट की दुर्दशा देख उन्हें भी दुख होता है। कोच होते तो यहां से भी बेहतर खिलाड़ी निकलते। पिंटू यादव ने कहा कि कोर्ट में लगा एस्ट्रोटर्फ टूटने से इसमें अभ्यास करने में भी चोटिल होने का डर बना रहता है। शिवम ने बताया कि कई सालों से यहां प्रशिक्षक नहीं है, ऐसे में किसकी देखरेख में अभ्यास करें। हिमांशु सिंह ने बताया कि प्रशिक्षक नहीं होने से सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों का ही होता है।
बास्केट बॉल कोर्ट की मरम्मत एवं प्रशिक्षक की तैनाती का प्रस्ताव खेल निदेशालय को भेजा गया है। शासन से बास्केट बॉल कोर्ट, स्विमिंग पुल, बैडमिंटन हॉल की मरम्मत, खिलाड़ियों के लिए नए छात्रावास के लिए धन भी जारी हो गया है। शीघ्र ही ये कार्य यहां होने हैं। -केके पांडेय, जिला क्रीड़ाधिकारी