हाथी अपने महावत को मारे या फिर किसी अन्य को निशाना बनाए, वन विभाग बेखबर बना हुआ है। वन विभाग के अनुसार जिले में नौ लोगों के पास हाथी होने का रिकॉर्ड तो है, मगर किसी ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। इस पर कार्रवाई के सवाल पर अफसर चुप्पी साध लेते हैं।
वन विभाग का रिकॉर्ड भी दुरुस्त नहीं है, क्योंकि जिले में इस समय दस से ज्यादा हाथी हैं। लाइसेंस किसी का नहीं बनवाया गया है। हाथी से होने वाली घटनाओं के बाद वन विभाग की सक्रियता कटघरे में होती है। ताजा मामला सोमवार की दोपहर का है। भाजपा विधायक के हाथी ने महावत को पटककर मार डाला। इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जिले में हाथी के हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। नियमानुसार वन विभाग में हाथी का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, ताकी विभाग की ओर से पशु डॉक्टर उसकी समय-समय पर जांच कर सकें। पर न तो वन विभाग की ओर से हाथी पालकों से संपर्क करने की कोशिश की गई और न ही खुद हाथी पालने के शौकीन लोग ही वन विभाग से संपर्क किए। हादसा होने के बाद नाम उजागर होने पर मामले को रफा-दफा करने में सभी जुट जाते हैं और फिर एकाध कागजी कार्रवाई कर फाइल बंद ही कर दी जाती है।
अभी कुछ महीने पहले ही हाथी ने एक ऑटो का पलट दिया था, जिससे दबकर बच्चे की मौत हो गई थी। इस मामले में केस तो दर्ज किया गया, लेकिन फिर तकनीकी रूप से हाथी की वजह से हादसा न होने की रिपोर्ट लगा दी गई। हालांकि अभी इस प्रकरण की जांच जारी है।
डीएफओ अश्वनी ने कहा कि वन विभाग की ओर से नौ लोगों को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस का जवाब आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। विधायक के हाथी के बारे में जानकारी नहीं थी। नियमानुसार जो कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।
विधायक के हाथी की जानकारी ही नहीं
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक भाजपा विधायक विपिन सिंह के पास हाथी है, इसकी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं थी। सोमवार को हादसा होने के बाद वन विभाग को भी इसकी खबर हुई है। हालांकि इस घटना के बाद अब तक वन विभाग की ओर से न कोई नोटिस दिया गया, न ही कोई अन्य कार्रवाई की गई है।
हाथी को जब्त कर सकता है वन विभाग
हाथी पालने का रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वालों के खिलाफ वन विभाग न्यायालय में अर्जी देता है। कोर्ट के आदेश के बाद हाथी को जब्त किया जाता है। फिर जांच पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है।
यह है नियम
हाथी लेने के बाद चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डेन से एनओसी लेना होता है। एनओसी के लिए पालक को आवेदन करना होता है। फिर वन विभाग की टीम जांच कर एनओसी और लाइसेंस देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है। लाइसेंस न होने पर हाथी को न्यायालय के माध्यम से जब्ती की कार्रवाई होती है। हाथी की जांच में यदि वह मानसिक स्थिति ठीक नहीं होती है तो उसे मथुरा और अन्य को दुधवा वन रेंज में भेजा जाता है।
इनके पास है हाथी, केस भी दर्ज
बड़हलगंज रेंज में चिल्लूपार के पारसनाथ यादव के यहां मादा हाथी है। खजनी रेंज के पानापार के रामनारायण शुक्ला के पास मादा हाथी। बांसगांव रेंज में रामजी यादव के पास हाथी है। परतावल रेंज में तरकुलवा के जय प्रकाश सिंह, चंदरपुर निवासी लक्ष्मी प्रसाद पटेल, बांसगांव रेंज में शिवाजी सिंह, सहजनवां वन रेंज में रानीडी निवासी सुरेश चौबे के पास हाथी है। तिनकोनिया रेंज में पूर्व मंत्री जितेंद्र कुमार जायसवाल के यहां एक नर और एक मादा हाथी है। शासन के आदेश पर इन सभी के खिलाफ दिसंबर 2018 में हुए सर्वेक्षण के बाद इन पर बिना अनुमति हाथी पालने का केस दर्ज कराया गया था।