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गोरखपुर: पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहीं जिला कारागार की महिला बंदी

Wed, 15 Jan 2020 10:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मंडलीय कारागार में बंद महिला बंदी समाज को पॉलिथीन के इस्तेमाल का अपराध नहीं करने का संदेश दे रहीं हैं। गोरखपुर महोत्सव में मंडलीय कारागार के स्टॉल में महिला बंदियों के हाथ से बनाए गए जूट के झोले लोगों को पॉलिथीन के विकल्प के रूप में भा रहे हैं। यही कारण है कि मात्र तीन दिन में दो सौ से अधिक झोले बिक चुके हैं।
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मंडलीय कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने बताया कि भारत सरकार की कौशल विकास योजना (स्किल इंडिया) के तहत बंदियों को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है ताकि कारागार से बाहर निकलने के बाद उन्हें रोजी-रोटी के लिए भटकना न पड़े। बंदियों को पर्यावरण मित्र रोजगार की ट्रेनिंग दी जा रही है। जेल में महिला बंदियों को जूट के झोले और शृंगार की सामग्री बनाने की ट्रेनिंग दी गई है। बंदियों की बनाई गई सामग्री को महोत्सव में प्रस्तुत किया गया है।
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कारागार स्टॉल पर मौजूद बंदीरक्षक कैलाश नाथ पांडेय, हरीश मिश्रा, तमन्ना, रोहित कुमार शुक्ला ने बताया लोगों को जूट के झोले पसंद आ रहे हैं। इसका कारण झोले का वाजिब दाम है। बाजार में जूट का रेडीमेड झोला साठ से सत्तर रुपये में मिलता है कारागार में निर्मित यह झोला चालीस रुपये में दिया जा रहा है। झोला खरीदने वाले आशुतोष सिंह ने बताया कि कारागार के उत्पाद की सिलाई और गुणवत्ता भी रेडीमेड झोलों से काफी अच्छी है।

महिलाओं को यादगार बिंदी
मंडलीय कारागार में महिलाओं के बनाए झोले ही नहीं यादगार बिंदी और ज्वेलरी भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। स्टॉल पर महिला और पुरुष बंदियों के हाथों बनाई गई ज्वैलरी यादगार ब्रांड के नाम से शोकेस की गई है। यहां ईयररिंग, हैंडबैंड, हार, बुुंदे, नेकलेस, कंगन, चूूड़ियां आदि रखे हैं। बिंदी से लेकर अन्य ज्वेलरी बाजार के रेडीमेड आइटम से काफी सस्ती हैं। 70 रुपये से लेकर 200 रुपये के बीच बेहतरीन ज्वेलरी दी जा रही है। मेले में आईं पयर्टक शबनम अमीन ने बताया कि उन्होंने यह ज्वेलरी इसलिए खरीदी है क्योंकि इस धन का उपयोग महिला बंदियों के कल्याण में खर्च किया जाएगा। बंदी रक्षक तमन्ना ने बताया कि सामाजिक संस्था पूर्वांचल ट्रेडिंग के ट्रेनरों ने बंदियों को ज्वेलरी बनाने की ट्रेनिंग दी है।
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