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इस बीमारी को लेकर चिंता में हैं विशेषज्ञ, बोले- जानलेवा हो सकता है यह रोग

Wed, 03 Feb 2021 02:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
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पूर्वांचल में पुरुषों को स्तन से संबंधित बीमारी गाइनेकोमैस्टिया विशेषज्ञों को चिंता में डाले हुए है। एम्स में स्तन रोगियों के लिए शुरू हुई ओपीडी में ऐसे मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। एम्स के मीडिया प्रभारी डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों की संख्या फिलहाल कम है, लेकिन जैसे-जैसे ओपीडी चलेगी मरीजों की संख्या बढ़ती जाएगी। इस रोग से ज्यादातर युवा पीड़ित हैं, लेकिन वे शर्म के कारण इस बीमारी का इलाज नहीं कराना चाहते हैं।
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डॉ. गुप्ता ने बताया कि इलाज न कराने वाले लोगों के लिए यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। जानकारी के मुताबिक एम्स में स्तन रोगियों की ओपीडी शुरू की गई है। शुरुआती चरण में तो महिलाएं इलाज के लिए आईं। लेकिन अब पुरुष भी ओपीडी में आने शुरू हो गए हैं। ओपीडी के दिन स्तन की बीमारी से ग्रसित तीन से चार इलाज के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुरुषों को स्तन से संबंधित बीमारी को गाइनेकोमैस्टिया कहते हैं।

करीब 50 फीसदी पुरुष अपने जीवन काल में इस बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं। लेकिन लड़कों को यह सबसे ज्यादा किशोरावस्था में होता है। इस रोग में सीने पर वसा ऊतक (फैट टीश्यूज) बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसकी वजह से दर्द होता है। ज्यादातर लोग इस बीमारी को शर्म की वजह से छिपाते हैं। जबकि ऐसा करने से वह खुद की जान खतरे में डाल रहे हैं।
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क्या है गाइनेकोमैस्टिया

गाइनेकोमैस्टिया पुरुषों में एस्ट्रोजेन और एंड्रोजन हार्मोन में असंतुलन के कारण होती है। पुरुषों में एस्ट्रोजेन (मादा हार्मोन) का स्राव एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) से अपेक्षाकृत अधिक हो जाता है तो इसमें पुरुषों का स्तन बढ़ जाता है। इसकी वजह से उनका सीना बेडौल नजर आने लगता है।

गाइनेकोमैस्टिया का इलाज है संभव
डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि गाइनेकोमैस्टिया आसानी से ठीक हो जाता है। इसका इलाज संभव है। इसलिए इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ मामलों में छोटी सर्जरी भी की जाती है। इनमें लाइपोसक्शन और सर्जिकल विधियों के जरिये अतिरिक्त वसा और ग्रंथि युक्त टिश्यूज को हटा दिया जाता है। कुछ मामलों में ऊपरी त्वचा को भी टाइट करना पड़ता है। यह सर्जरी लोकल या जनरल एनेस्थीसिया देकर की जाती है। सीने के निचले भाग में एक छोटा छेद किया जाता है जिसके जरिये लाइपोसक्शन कैन्युला या ट्यूब को भीतर डाला जाता है। 
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