पूर्वांचल में पुरुषों को स्तन से संबंधित बीमारी गाइनेकोमैस्टिया विशेषज्ञों को चिंता में डाले हुए है। एम्स में स्तन रोगियों के लिए शुरू हुई ओपीडी में ऐसे मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। एम्स के मीडिया प्रभारी डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों की संख्या फिलहाल कम है, लेकिन जैसे-जैसे ओपीडी चलेगी मरीजों की संख्या बढ़ती जाएगी। इस रोग से ज्यादातर युवा पीड़ित हैं, लेकिन वे शर्म के कारण इस बीमारी का इलाज नहीं कराना चाहते हैं।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि इलाज न कराने वाले लोगों के लिए यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। जानकारी के मुताबिक एम्स में स्तन रोगियों की ओपीडी शुरू की गई है। शुरुआती चरण में तो महिलाएं इलाज के लिए आईं। लेकिन अब पुरुष भी ओपीडी में आने शुरू हो गए हैं। ओपीडी के दिन स्तन की बीमारी से ग्रसित तीन से चार इलाज के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुरुषों को स्तन से संबंधित बीमारी को गाइनेकोमैस्टिया कहते हैं।
करीब 50 फीसदी पुरुष अपने जीवन काल में इस बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं। लेकिन लड़कों को यह सबसे ज्यादा किशोरावस्था में होता है। इस रोग में सीने पर वसा ऊतक (फैट टीश्यूज) बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसकी वजह से दर्द होता है। ज्यादातर लोग इस बीमारी को शर्म की वजह से छिपाते हैं। जबकि ऐसा करने से वह खुद की जान खतरे में डाल रहे हैं।