गिरफ्तार करने वाली टीम की पूछताछ में सत्येंद्र ने बताया कि वह 500 से 700 रुपये अधिक लेकर टिकट कंफर्म कराता है। बताया कि सांसदों के लेटर पैड का प्रयोग कर सीसीएम कार्यालय से टिकट कंफर्म कराता है। उसके लोगों का संपर्क सांसदों के कुछ प्रतिनिधियों से है। 200 से 300 रुपये प्रतिनिधियों को देकर लेटर पैड पर हस्ताक्षर करा लेते थे और सीसीएम कार्यालय में जमा कर देते थे।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान पहले सत्येंद्र पाल ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उसने खुद को पत्रकार बताया और नाम भी कुछ और बताया, लेकिन जांच के दौरान उसके दोनों दावे झूठे निकले।
मोबाइल की गैलरी में मिले 35 हस्ताक्षर किए लेटर पैड
टीम ने जब दलाल सत्येंद्र के मोबाइल की जांच की तो उसकी गैलरी में तीन सांसदों के 35 लेटर पैड मिले। सभी पर सांसदों के हस्ताक्षर थे। लेटर पैड का प्रिंट आउट निकालकर हस्ताक्षर जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच के बाद पता चलेगा कि सांसदों के हस्ताक्षर असली हैं या नकली। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
सीपीआरओ एनईआर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि रेलवे का सतर्कता विभाग व आरपीएफ अभियान चलाकर ट्रेन का फर्जी टिकट बनाने वाले दलालों को पकड़ता है। जो पकड़े जाते हैं, उन सबके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है। सतर्कता विभाग की टीम ने एक दलाल को रंगे हाथ टिकट के साथ पकड़ा है। कानूनी कार्रवाई की गई है। टिकट हमेशा रेलवे काउंटर, आईआरसीटीसी की वेबसाइट या रेलवे के अधिकृत एजेंट से ही लेना चाहिए।