टिकट के दावेदारों से भाजपा गोरखपुर क्षेत्र के नेता परेशान हैं। दबाव का ही नतीजा है कि क्षेत्र के ज्यादातर पदाधिकारियों ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। दावेदार बायोडाटा लेकर इधर-उधर घूम रहे हैं। तमाम दावेदारों ने कार्यालय प्रभारी को बायोडाटा दिया है। सब आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट मांग रहे हैं।
भाजपा में टिकट वितरण के मानक तय हैं। सबसे पहले जिला या फिर महानगर इकाई टिकट के दावेदारों का पैनल बनाकर क्षेत्रीय इकाई को भेजती है। क्षेत्रीय इकाई नामों पर मंथन करती है, फिर हर विधानसभा क्षेत्र से तीन-तीन नामों का पैनल फाइनल करके प्रदेश इकाई को भेज देती है। प्रदेश इकाई, यही पैनल राष्ट्रीय इकाई के पास भेजती है। इनमें से एक नाम पर मुहर लग जाती है।
रैली, जनसभा व रोड शो पर प्रतिबंध के बाद भाजपा विधायकों ने चुनाव प्रचार का तरीका बदल दिया है। अब सारा जोर डोर टू डोर व मैन टू मैन संपर्क अभियान पर है। जो समय बचता है, उसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं। लाइव होकर क्षेत्र की जनता से सीधा संवाद करते हैं। सरकार व अपना कामकाज गिनाकर वोट मांग रहे हैं। यह सिलसिला मंगलवार से ही शुरू हुआ है।