प्रदेश महामंत्री की रेस में गोरखपुर के समीर सिंह का नाम भी चर्चा में था। वह अभी प्रदेश प्रवक्ता का दायित्व निभा रहे हैं। डॉ शकुंतला चौहान को गोरखपुर का जरूर बताया गया था लेकिन वह मूल रूप से मऊ की रहने वाली हैं। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने जो कमेटी बनाई है, उसमें बस्ती के सुबास यदुवंश प्रदेश मंत्री बनाए गए हैं। सुबास भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। अति पिछड़ा समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मऊ की डॉ. शकुंतला चौहान (लोनिया) प्रदेश मंत्री बनी हैं। वह भी अति पिछड़ा समाज से आती हैं। भाजपा की क्षेत्रीय इकाई में क्षेत्रीय मंत्री हैं। संतकबीरनगर के त्रयंबक त्रिपाठी को प्रदेश मंत्री का दायित्व मिला है। वह ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। संतकबीरनगर के त्रयंबक त्रिपाठी ने आरएसएस के साथ 1989 से 2009 तक काम किया है।
2010 से भाजपा में सक्रिय हुए हैं। दो बार गोरखपुर क्षेत्र के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। दूसरी बार प्रदेश मंत्री बने हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों का सफल आयोजन भी कर चुके हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी बलिया के दयाशंकर सिंह व आजमगढ़ की लालगंज सीट से भाजपा की पूर्व सांसद नीलम सोनकर को मिली है।
दयाशंकर क्षत्रिय तो नीलम अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करती हैं। दयाशंकर सिंह के पास संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है। दो बार संगठन में प्रदेश मंत्री रहे। तीसरी बार प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। नीलम सोनकर महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री रह चुकी हैं। भाजपा राष्ट्रीय परिषद की सदस्य हैं। प्रदेश महामंत्री व कोषाध्यक्ष का पद गोरखपुर क्षेत्र के किसी नेता को नहीं मिला है।
भाजपा ने अलग-अलग समुदाय के लोगों को प्रतिनिधित्व देकर भले ही सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश है लेकिन प्रदेश कमेटी में कायस्थ समाज को जगह नहीं मिली है। गोरखपुर क्षेत्र में कायस्थों की बड़ी आबादी रहती है। गोरखपुर शहर में ही तीन से चार लाख कायस्थ रहते हैं।
बस्ती, आजमगढ़, सिद्धार्थनगर में भी कायस्थों की संख्या अच्छी है। इसे लेकर समाज के लोगों में नाराजगी भी है। उनका कहना है कि भाजपा कायस्थों को अपना कैडर वोटर मानने लगी है। वह सोचती है कि कायस्थ किसी दूसरी पार्टी से नहीं जुड़ेंगे। इसी वजह से प्रदेश स्तरीय संगठन में जगह नहीं दिया गया।
यूपी सरकार में गोरखपुर क्षेत्र की मजबूत पकड़ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी गोरखपुर से हैं। लिहाजा, संगठन व सरकार में सामंजस्य बनाने की कोशिश की गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल का बड़ा चेहरा हैं। वह अच्छा काम कर रहे हैं। संगठन व कार्यकर्ताओं को बांधें रखने में माहिर हैं।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जय प्रकाश निषाद, स्वास्थ्य मंत्री राजा जय प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षामंत्री सतीश द्विवेदी, मंत्री श्रीराम चौहान, दारा सिंह चौहान, अनिल राजभर व आनंद स्वरूप शुक्ला भी इसी क्षेत्र से आते हैं। कुछ दिन पहले ही गोरखपुर के जय प्रकाश निषाद को राज्यसभा का सदस्य चुना गया है। ऐसे में गोरखपुर को छोड़कर संगठन में दूसरे क्षेत्रों को तवज्जो दी गई है।