दरोगा ने आरोप लगाया कि बाबू द्वारा फाइल को एसएसपी के सामने पेश करने के लिए 10 प्रतिशत के हिसाब से 18 हजार रुपये घूस मांगा जा रहा था। उसने 5000 रुपये देने को कहा लेकिन लेकिन बड़ा बाबू ने इनकार कर दिया।
13 जून को लखनऊ पहुंचकर एंटी करप्शन के तत्कालीन एसपी राजीव मल्होत्रा से शिकायत की। उनकी शिकायत पर हफ्ते भर के अंदर ही लखनऊ की टीम इंस्पेक्टर हरि सिंह की अगुवाई में गोरखपुर पहुंची और दरोगा पंकज को रुपये लेकर बड़ा बाबू के पास भेजा दिया। दोपहर बाद दो बजे का वक्त था, दरोगा पंकज ने बड़े बाबू के ऑफिस में पहुकर उन्हें 5000 रुपये देकर बाकी रकम बाद में देने को कहा।
इस दौरान वहां पर मौजूद टीम ने बड़े बाबू को रंगे हाथ घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। टीम ने बाबू ज्ञानेंद्र सिंह को कैंट पुलिस को सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। जेल से रिहा होने के बाद बड़े बाबू पुलिस कार्यालय में ही तैनात थे। शासन ने ज्ञानेंद्र सिंह के अमर्यादित आचरण को लेकर बर्खास्त कर दिया है।