प्रांतीय होम्योपैथी चिकित्सा सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर जिले की ही किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहिए। गोरखपुर के विकास को नई ऊंचाइयां मिली हैं। योगी चुनाव लड़ें और हम वोट करें, यही इच्छा है। अयोध्या या फिर मथुरा से चुनाव लड़ने का फायदा गोरखपुरवासियों को नहीं मिलेगा। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को अपने प्रस्ताव पर नए सिरे से विचार करना चाहिए। इसमें गोरखपुरवासियों के साथ ही भाजपा की भी भलाई है। गोरक्षपीठाधीश्वर को दूसरी जगह भेजने का नुकसान हो सकता है।
समाजसेवी आदिल अमीन ने कहा कि गोरखपुर का जितना विकास पांच वर्षों में हुआ है, उतना कभी नहीं हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़ने के लिए जिले की जनता बिल्कुल तैयार नहीं है। जिले की किसी भी सीट से चुनाव लड़ें, लेकिन यहीं रहें। दूसरी जगह जाकर चुनाव लड़ने की जरूरत नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो जनता की नाराजगी बढ़ेगी। गोरखपुर सहित आसपास के जिलों में भाजपा को नुकसान उठाना पड़ेगा। शीर्ष नेतृत्व ने गोरक्षपीठाधीश्वर को चुनाव लड़ाने का जो खाका तैयार किया, उसमें बदलाव जरूरी है। गोरक्षपीठाधीश्वर हमको छोड़कर जा रहे हैं, यह संदेश नहीं जाना चाहिए। जनता गोरक्षपीठाधीश्वर को पूजती है।
राजनीतिक हलके में योगी के प्रभाव की चर्चा
राजनीतिक हलके में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। सब कह रहे हैं कि गोरखपुर छोड़ने का जोखिम मुख्यमंत्री को नहीं उठाना चाहिए। यहां की हर सीट सुरक्षित है। जहां से नामांकन करेंगे, वहां से बिना प्रचार किए ही जीत जाएंगे। 2017 के चुनाव को देखें तो योगी आदित्यनाथ का प्रभाव साफ मिल जाएगा। गोरखपुर-बस्ती मंडल में विधानसभा की 41 सीटें हैं।
इसमें से 35 सीटें अकेले भाजपा ने जीती थी। दो सीटें भाजपा की सहयोगी दलों की मिली थीं। बस्ती मंडल में विपक्ष का खाता तक नहीं खुला था। गोरखपुर मंडल के चार जिलों में विपक्ष को चार सीटें ही मिल सकी थीं। इस प्रभाव को नजरअंदाज करना भाजपा के लिए ठीक नहीं रहेगा। ऐसा हुआ तो गोरखपुर-बस्ती मंडल में नुकसान उठाना पड़ सकता है।