इस सीट से सपा प्रत्याशी ब्रह्माशंकर त्रिपाठी मजबूती से चुनाव लड़ रहे हैं। ठीक यही हाल सिद्धार्थनगर की इटवा विधानसभा सीट का है। इस सीट से भाजपा ने बेसिक शिक्षामंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी को उतारा है। सपा से विधान परिषद के पूर्व सभापति माता प्रसाद पांडेय चुनाव लड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि डॉ. सतीश व ब्रह्माशंकर के बीच कांटे की टक्कर हुई है।
स्वामी प्रसाद का खेल बसपा प्रत्याशी ने बिगाड़ा
योगी सरकार में मंत्री रहे और सपा का दामन थामने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य भी कठिन लड़ाई में फंसे हैं। फाजिलनगर सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र कुशवाहा उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं। दरअसल, स्वामी का खेल बसपा ने बिगाड़ा है। बसपा ने इस सीट से इलियास अंसारी को प्रत्याशी बनाया है। इलियास पुराने समाजवादी हैं। समाजवादी पार्टी से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने भाजपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य को प्रत्याशी बना दिया है। इसी का नतीजा रहा कि इलियास ने बगावत कर दी और बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में कूद पड़े। बसपा प्रत्याशी जितना वोट पाएंगे, उसका नुकसान सपा प्रत्याशी को उठाना पड़ सकता है।
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू भी मुश्किल लड़ाई में फंसे
इसी तरह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी कठिन लड़ाई में फंसे बताए जा रहे हैं। तमकुही राज से कांग्रेस प्रत्याशी लल्लू को निषाद पार्टी-भाजपा प्रत्याशी डॉ. असीम कुमार राय से कड़ी चुनौती मिली है। सपा प्रत्याशी उदय नारायण गुप्ता भी मजबूती से चुनाव लड़ रहे हैं। लिहाजा, अजय कुमार लल्लू त्रिकोणीय लड़ाई में फंसे हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष 10 वर्षों से इस सीट से विधायक हैं। वे तीसरी बार चुनाव मैदान में उतरे हैं। लिहाजा, एंटी इनकंबेंसी का सामना भी करना पड़ रहा है। क्षेत्र की जनता बदलाव की बात कर रही है। हालांकि, लल्लू का खेमा जीत का दम भर रहा है।