समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार ब्रह्माशंकर त्रिपाठी पांच बार कसया एवं कुशीनगर से विधायक रह चुके हैं। सपा शासनकाल में दो बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं। कसया के पिपरा झाम गांव के मूल निवासी ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को राजनीति में 50 साल से अधिक का अनुभव है।
राजनीति की शुरूआत 1967 में की। 1989 में जद (जनता दल) से चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1993 में दोबारा विधायक बनने का अवसर उन्हें हासिल हो सका। वर्ष 2002 में सपा से चुनाव लड़कर फिर विधायक बनने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ।
2003 में उन्हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनने का अवसर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने दिया। वर्ष 2007 में कसया से चुनाव लड़े और फिर विधायक बनें। परिसीमन के बाद 2012 में कुशीनगर विधानसभा बन गई। जहां से चुनाव लड़कर एक बार फिर जीते।
बसपा- अभयनाथ त्रिपाठी
अभय नाथ ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद छात्र राजनीति शुरू की। इसके बाद राजस्व विभाग में उन्होंने देवरिया में सेवा शुरू की। लेकिन सरकारी सेवा से वीआरएस लेकर राजनीति में प्रवेश कर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में अपना भाग्य आजमाएं लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। अभयनाथ त्रिपाठी सिविल कोर्ट में अधिवक्ता भी हैं। बसपा ने उन पर भरोसा जताते हुए फिर प्रत्याशी बनाया है।
कांग्रेस ने देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में देवरिया खास निवासी मुकुंद भास्कर मणि त्रिपाठी पर अपना दांव लगाया है। मुकुंद लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े है। कई बार आंदोलन एवं धरना प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठियों के शिकार भी हुए है।
देवरिया खास निवासी विष्णु भास्कर मणि रोडवेज के रिटायर्ड अधिकारी है। उनके तीन पुत्रों में मुकुंद भास्कर दूसरे नंबर के है। इनकी योग्यता एमए है। राजनीति की शुरुआत मुकुंद भास्कर ने वर्ष 1991 में राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला महामंत्री के रूप में की। इसके बाद एनएसयूआई के प्रदेश महामंत्री, जिले में यूथ कांग्रेस के महासचिव, प्रदेश सचिव के बाद जिला कांग्रेस कमेटी में महासचिव रह चुके हैं।
निर्दल- अजय कुमार सिंह
भाजपा ने स्वर्गीय विधायक जन्मेजय सिंह के बेटे अजय कुमार सिंह को टिकट न देकर परिवारवाद के आरोपों से बचने की कोशिश की है। यह सीट पिछले आठ सालों से भाजपा के पास है। लिहाजा, पार्टी किसी भी तरह का मौका विपक्ष को नहीं देना चाहती थी।
देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव भाजपा विधायक स्वर्गीय जन्मेजय सिंह के निधन के बाद कराया जा रहा है। स्वर्गीय जन्मेजय सिंह के बेटे अजय कुमार सिंह ने भी टिकट की दावेदारी की थी लेकिन पार्टी में आंतरिक तौर पर विरोध हो गया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ा है।
बता दें कि यूपी विधानसभा की सात खाली सीटों पर उपचुनाव के लिए तीन नवंबर को मतदान हुआ था। इसके परिणाम 10 नवंबर को आएंगे। इन सीटों 88 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की थी जिनकी किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद हो चुका है। ये सीटें हैं अमरोहा जिले की नौगंवा सादात, बुलंदशहर, फिरोजाबाद, जिले की टूण्डला सुरक्षित, उन्नाव की बांगरमऊ, कानपुर नगर की घाटमपुर सुरक्षित, देवरिया और जौनपुर की मल्हनी।