उसी के तुरंत बाद ब्लॉक प्रमुख पद पर सेमरियावां ब्लॉक से अपने करीबी पूर्व प्रमुख मुमताज अहमद की मां को सपा से चुनाव लड़ाया और उसमें भी जीत हासिल हुई। इन्हीं वजहों से इनकी भाजपा से दूरी बढ़ती गई और सपा की ओर इनका खिंचाव हुआ। रविवार को जय चौबे भाजपा छोड़ कर सपा में शामिल हो गए। इनके सपा में जुड़ने से पार्टी को मजबूती मिली है।
कुशल और जय चौबे हुए साथ, दिखेगा बड़ा बदलाव
पूर्वांचल में खासकर ब्राह्मण समाज में पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी की अच्छी पकड़ मानी जाती है। पूर्वांचल में इन्हें ब्राह्मण चेहरे के रूप में देखा भी जाता है। वर्ष 2007 में पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव की सरकार में पंडित हरिशंकर तिवारी कैबिनेट मंत्री भी रहे। इन्हीं के बड़े पुत्र भीष्मशंकर उर्फ कुशल तिवारी बसपा से दो बार संतकबीरनगर से सांसद रहे। जबकि इनके छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी वर्ष 2017 में गोरखपुर जिले के चिल्लूपार विधान सभा से बसपा के विधायक चुने गए।
इनके रिश्तेदार गणेश शंकर पांडेय विधान परिषद के पूर्व सभापति है। खलीलाबाद के विधायक जय चौबे का तिवारी परिवार से पहले से गहरा नाता है। विधायक जय चौबे और पूर्व सांसद कुशल तिवारी साथ हो गए। इससे सपा को मजबूती मिली है। यह जोड़ी संतकबीरनगर की तीनों सीटों पर प्रभाव डाल सकती है।