गोरखपुर। चौथी मुहर्रम के अवसर पर शहर की विभिन्न मस्जिदों और इमाम चौकों में आयोजित महफिल ‘जिक्रे शुहदा-ए-कर्बला’ में कर्बला की दर्दनाक दास्तान बयान की गई, जिसे सुनकर अकीदतमंद गमगीन हो गए। लोगों ने कुरआनख्वानी और फातिहाख्वानी के जरिये शुहदा-ए-कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की।
सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर के पास अली बहादुर शाह नौजवान कमेटी की ओर से लोगों में बिरयानी, लस्सी, चाय और चिप्स वितरित किए गए। वहीं जमुनहिया बाग में शिक्षक आसिफ महमूद, हस्सान और हादी ने शरबत बांटा। विभिन्न मोहल्लों में बच्चे और बड़े ऊंट की सवारी करते नजर आए, जबकि हलवा-पराठे की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ रही।
गाजी मस्जिद गाजी रौजा में आयोजित महफिल में मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद ने फरमाया कि हसन और हुसैन जन्नती जवानों के सरदार हैं। उन्होंने बताया कि इनसे मुहब्बत करना दरअसल पैगंबर और अल्लाह से मुहब्बत करना है।
मकतब इस्लामियात चिंगी शहीद इमाम चौक तुर्कमानपुर में अनस नक्शबंदी ने कहा कि कर्बला की जंग हक और इंसाफ की लड़ाई थी, जिसमें हजरत इमाम हुसैन ने सत्य और धर्म की रक्षा के लिए शहादत स्वीकार की। वहीं मौलाना अली अहमद ने कहा कि कर्बला में 72 जानिसारों ने शहादत देकर इंसानियत को जुल्म के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया।
गुलशने रजा एकेडमी में आलिमा सबीहा खातून ने कहा कि इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी हमेशा इंसानियत को सच और न्याय के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी। कार्यक्रमों के अंत में दुरूदो सलाम पढ़कर दुआ मांगी गई और शीरीनी वितरित की गई।