जितेंद्र ने बताया कि वह रेलवे में नौकरी करता। बातचीत में जितेन्द्र ने उन दोनों से पूछा कि तुम लोग इस नौकरी मे कितना कमा लेते हो। दोनों ने बताया कि उन्हें हाथ में 7-8 हजार रुपये मिल जाते हैं। जितेंद्र ने कहा कि रेलवे में उसके परिचित साहब हैं जो तुम्हारी नौकरी संविदा पर लगवा देंगे बाद में परमानेंट नौकरी होने पर दो से ढाई लाख रुपये देने होंगे। झांसे में आए रियासत और अनुज को जितेंद्र ने अपना मोबाइल नंबर दिया और यहीं से जालसाजी की शुरुआत हो गई।
जनवरी 2021 में उनका एक मित्र दिनेश यादव भी जाल में फंस गया और तीनों की बातचीत जितेंद्र कुमार त्रिपाठी से रेलवे में संविदा पर भर्ती के संबंध में होने लगी। आरोप है कि जितेंद्र कुमार उनसे कभी एक हजार, कभी दो हजार, कभी तीन हजार रुपये वसूलता रहता था।
अक्तूबर में दे दिया था नियुक्तिपत्र
अक्तूबर 2021 में जितेन्द्र ने तीनों को एक नियुक्तिपत्र भी दे दिया था। नौ नवंबर 2021 को लेटर में लिखे रेलवे स्टेशन पर कुल आठ लोगों की नियुक्ति हुई थी, जिसमें रियासत अली ,अनुज तथा दिनेश का भी नाम था। बाद में जितेंद्र ने फोन करके बताया कि वह लेटर निरस्त हो गया है। नवंबर 2021 में उसने एक दूसरा लेटर दिया जिसमें तीनों की पोस्टिंग सीतापुर रेलवे स्टेशन पर होनी बताया गया था। दूसरा लेटर मिलने के बाद भी जब उनकी नौकरी नहीं लगी तो उन्होंने फिर जितेंद्र संपर्क किया तो उसने कहा कि जैसे ही तुम लोगों की पोस्टिंग होगी मैं फोन करके बताऊंगा।