गोरखधाम एक्सप्रेस ही एक ऐसी ट्रेन है जो गोरखपुर से रोजाना जाती और इसमें सभी श्रेणी के कोच लगते हैं। पहले इस ट्रेन जनरल के नौ कोच लगते थे, फिर छह हुए और अब तीन कोच रहे गए हैं। एक एलएचबी कोच में 108 सीटें होती हैं। इस हिसाब से 630 सीटें कम हो गईं। इसी प्रकार स्लीपर के तीन कोच कम हो गए। ऐसे में 240 सीटें कम हो गईं हैं। जबकि, एसी थ्री की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
ट्रेनें चलाते गए और संसाधन पर ध्यान नहीं दिए
वर्तमान में नई ट्रेन चलाने की स्थिति में रेल प्रशासन नहीं है। इसकी प्रमुख वजह है कि पिछले 10 वर्षों में ट्रेनों की संख्या तो बढ़ाई गई लेकिन, संसाधन बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में पटरियों पर लोड बढ़ता गया। पूर्वोत्तर रेलवे में अब तीन वर्षों से आधारभूत संरचना को बढ़ाने के लिए काम हो रहे हैं। सिंगल लाइन को डबल लाइन में बदलने का काम लगभग पूरा हो चुका है, बावजूद इसके पटरियां खाली नहीं हैं।
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दिल्ली के लिए सुपरफास्ट ट्रेन का किराया
| जनरल |
स्लीपर |
एसी 3 |
| 235 |
395 |
1165 |
- गोरखपुर से जाने वाली कुल ट्रेनें : 182
- गोरखपुर से चलने वाली ट्रेनें : 37
- दिल्ली के लिए गोरखपुर से ट्रेनें : 02
- बिहार से दिल्ली के लिए ट्रेनें : 10
- दिल्ली के लिए रोजाना यात्रियों की संख्या : 5 हजार
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यात्री बोले
यात्री रवि भूषण राय ने कहा कि गोरखपुर और आसपास के जिलों के ज्यादातर लोग कामकाज के लिए दिल्ली जाते हैं। हमारी प्राथमिकता जनरल या स्लीपर कोच है। इसका किराया हमारे बजट में भी है। लेकिन, रेल प्रशासन इसके उलट एसी कोच बढ़ाते जा रहा है। मेरा बजट इतना नहीं है, मजबूरी है कि जनरल कोच में धक्के खाते जाऊंगा।
यात्री सुमित कुमार ने कहा कि मुझे भी परिवार के साथ जाना था। अब स्लीपर कोच में टिकट नहीं मिला तो एसी कोच में आरक्षण कराया हूं। इसके लिए मुझे मित्र से उधार लेना पड़ा है। अब वेतन मिलते को चुकाउंगा। दिल्ली जाना है तो अब किसी तरह जाना ही पड़ेगा।