गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे की पहली हेरिटेज लाइन मैलानी-नानापारा अब बारिश और बाढ़ में पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी। ब्रॉड गेज (बड़ी लाइन) की तरह अब मीटर गेज (छोटी लाइन) की मरम्मत आधुनिक डुओमेटिक मशीन से की जाएगी। इससे ट्रैक का रख-रखाव आसान होगा और पटरियां मजबूती बनेंगी। बारिश और बाढ़ का पानी रेलवे ट्रैक के किनारे तक पहुंचने पर भी हेरिटेज ट्रेनें चलाईं जा सकेंगी।
मैलानी-नानापारा के बीच भीरा-पलियाकलां, अटरिया गांव के पास कई बार शारदा नदी के बाढ़ का पानी आ जाने से जलभराव हो जाता है और रेल पटरियों के नीचे मिट्टी बहने लगती है। इसके चलते नानपारा-मैलानी और बिछिया-मैलानी टूरिस्ट पैसेंजर निरस्त करनी पड़ती है। 170 किमी लंबी रेल लाइन में 16 स्टेशन और 71 पुल (19 बड़े और 52 छोटे) हैं। यहां रेलवे ट्रैक का रखरखाव रेलकर्मी लगाकर किया जाता है। इसके बाद भी पानी का रिसाव होने लगता है। अब डुओमेटिक मशीन से बेहतर लेवलिंग होगी और अलाइनमेंट भी सटीक होगा। वहीं, पुराने स्लीपर हटाकर कंक्रीट स्लीपर लगाए जाएंगे ताकि ट्रेन के गुजरने से रेलवे ट्रैक मजबूत रहे। इससे ट्रेन के पटरी से उतरने की आशंका भी कम हो जाती है।