विभागीय जानकारों के अनुसार इस बार आरक्षण तय किए जाते समय यह देखा जाएगा कि कौन से ऐसे गांव हैं, जहां 1995 से लेकर 2015 तक कभी भी सीट अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़ा नहीं रही। जो गांव कभी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं रहे, उन्हें इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जा सकता है।
ठीक इसी तरह जिन गांवों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण नहीं रहा, वहां इस वर्ग के लिए आरक्षित किया जा सकता है। इसके बाद जो गांव बचेंगे वहां आबादी के अनुसार सामान्य तरीके से आरक्षण की व्यवस्था लागू हो सकती है।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने कहा कि 15 फरवरी को आरक्षण के संबंध में शासन में ट्रेनिंग आयोजित होने की सूचना मिली है। गोरखपुर समेत सभी जिलों के एएमए और डीडी पंचायत को भी ट्रेनिंग के लिए बुलाया गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब शासनादेश का इंतजार है। जैसे ही शासनादेश मिलेगा आरक्षण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।