दोपहर 2.40 बजे छात्रसंघ चौराहे के पास एक शख्स गाड़ी लेकर आगे बढ़ गया और फंस गया। यातायात पुलिसकर्मी के वजह पूछने पर शख्स ने ट्रैफिक लाइट की दुहाई दी। दरअसल, सामने वाली लाइट पर काउंटिंग शून्य हो गई थी और वह आगे बढ़ गया, जबकि वह पीछे से आने वाली लेन का सिंग्नल था। इसी तरह, पैडलेगंज, यूनिवर्सिटी और कई ऐसे चौराहे हैं, जहां पर सिग्नल अभी मुसीबत बने हुए है। दूसरे, ट्रैफिक लाइट के सामने कई जगह होर्डिंग का अवरोध है, जिससे परेशानी होती हैं।
बच्चों, कीमती सामान को खोजने में भी मददगार
इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत चौराहों पर लगे स्पीकर से एनाउंस कर कीमती सामान और बच्चों को खोजने में भी पुलिस मददगार बन रही है। बृहस्पतिवार को भी असुरन के सुशील वर्मा का बैग खोजने में पुलिस मददगार बनी। वह ऑटो से उतरे और बैग उसी में छूट गया था। जानकारी के बाद पुलिस ने सूचना प्रसारित की और उनका बैग मिल गया। दिसंबर में 12 गुुमशुदा लोगों को उनके अपनों से मिलाया गया। 98 बैग, पांच मोबाइल फोन और सात लैपटॉप की भी तलाश की गई थी।
इस तरह ले सकते हैं मदद
आईटीएमएस कार्यालय के मोबाइल नंबर 8081208567 पर कॉल करें। फोन नहीं रहने पर सड़क किनारे लगे बाक्स में जाकर अपनी समस्या बताइए। 21 चौराहों पर आईटीएमएस के तहत इमरजेंसी बाक्स लगाए गए हैं। इमरजेंसी बाक्स में लगे लाल बटन को दबाकर कोई भी व्यक्ति अपनी बात कंट्रोल रूम में पहुंचा सकता है। कंट्रोल रूम में बैठा आपरेटर समस्या और जगह की जानकारी लेने के बाद तत्काल 112 नंबर पर फोन कर सहायता भेजेरा। यदि कोई हादसा हुआ है तो कंट्रोल रूम से एंबुलेंस के लिए भी मदद मांगी जा सकती है।
एसपी ट्रैफिक डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि स्टंट और नियम तोड़ने वालों की लगातार काउंसलिंग की जा रही है। यातायात सुचारु रूप से चल सके, इसके लिए सभी चौराहों पर यातायात पुलिस और होमगार्ड की ड्यूटी है। बारा-बार नियम तोड़ने के मामलों में जुर्माना कर शमन शुल्क वसूला जा रहा है। इसका असर हुआ है। अब हेलमेट न लगाने की लापरवाही में कम लोग पकड़े जा रहे हैं।