अब कपड़ों पर पूर्व की तरह पांच प्रतिशत जीएसटी ही लगेगी। एक जनवरी से प्रस्तावित 12 फीसदी टैक्स के निर्णय को सरकार ने वापस ले लिया। व्यापारियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रदेश सरकार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।
व्यापारी सरकार के इस फैसले को अपनी एकजुटता की जीत बता रहे हैं। व्यापारियों के विभिन्न वर्गों ने इस निर्णय की सराहना की है। व्यापारियों ने बताया कि कोरोना की मार से पहले ही व्यापारी पूरी तरह टूट चुके थे। इसी बीच इस फैसले ने उनके व्यापार को और कमजोर कर दिया था। गनीमत है कि सरकार ने व्यापारियों के दर्द को समझते हुए उनके हित का ख्याल करते हुए प्रस्ताव को टाल दिया।
सरकार के फैसले का स्वागत
चेंबर ऑफ टेक्सटाइल्स अध्यक्ष राजेश नेभानी ने बताया कि सरकार के फैसले सभी टेक्सटाइल्स व्यापारी स्वागत करते हैं। इसे लागू किए जाने के विरोध में एक दिन पहले ही व्यापारियों ने एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराया था। हमें उम्मीद थी कि सरकार हमारे हित का ख्याल रखेगी।
व्यापारियों को काफी राहत मिली
चेंबर ऑफ टेक्सटाइल्स महामंत्री संजय अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने जीएसटी की दरों को बढ़ाने का फैसला वापस ले लिया। इससे कपड़ा व्यापारियों के साथ अलावा ग्राहकों को भी फायदा मिलेगा। कोरोनाकाल में व्यापारी पहले से ही प्रभावित हैं। नई दरें लागू होने से काफी असर पड़ता। अब व्यापारी काफी राहत महसूस कर रहे हैं।
व्यापारियों के हित में लिया गया फैसला
पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष मणिनाथ गुप्ता ने बताया कि जीएसटी की दर में पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किए जाने के फैसले को सरकार ने टाल दिया। अब पहले की तरह ही पांच फीसदी जीएसटी लगेगी। सरकार का यह फैसले व्यापारियों के हित में लिया गया फैसला है।
एकजुट होने का परिणाम
चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय सिंघानियां ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने जीएसटी की दरों के बढ़ाए जाने का एकजुट होकर विरोध किया था। अब इस फैसले के वापस होने पर सभी व्यापारी संगठन सरकार के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं। दरें बढ़तीं तो व्यापारियों के साथ ग्राहकों को भी महंगाई झेलनी पड़ती।
जूते-चप्पल पर लागू होंगी नई दरें
जूता चप्पल कारोबारी शहजादे ने बताया कि जूते-चप्पलों पर जीएसटी की नई दर 12 प्रतिशत लगेगी। यानी जूता चाहे 100 का हो या 1000 रुपये का सभी पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगी। इससे एक जनवरी से जूते चप्पल लेने मंहगे हो जाएंगे। जूते चप्पल व्यापारियों में इसे लेकर काफी निराशा है।