उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के उपाध्यक्ष प्रमोद टेकरीवाल ने कहा कि प्रदेश का व्यापारी सरकार के राजस्व में कमी नहीं करना चाहता है। लिहाजा, उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। व्यापारियों ने कठिन समय में सरकार का साथ दिया है। अब सरकार को व्यापारियों की समस्याओं का ध्यान रखना चाहिए।
व्यापारी कल्याण बोर्ड की सहमति बिना ही लिया फैसला
गोरखपुर युवा उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष मनीष सक्सेना ने कहा कि जब उप्र व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन हुआ था, तब सरकार ने सहमति के बाद ही किसी नए कानून, आदेश पर फैसला लेने की बात कही थी। अब अनदेखी करके व्यापारियों के उत्पीड़न का आदेश पारित कर दिया गया। गोरखपुर युवा उद्योग व्यापार मंडल इस सर्वे का पूर्णरूप से विरोध करता रहेगा।
सर्वे करने की अनुमति का करेंगे विरोध
चेंबर ऑफ ट्रेडर्स के अध्यक्ष अनूप किशोर अग्रवाल ने बताया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा दुकानों का सर्वे औचित्यहीन है। इसका तगड़ा विरोध होगा। व्यापारिक आंदोलन के चलते पहले जो सर्वे बंद कर दिए गए हैं उन्हें फिर चालू करने का कोई मतलब नहीं है। इससे व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ेगा।
थोक वस्त्र व्यवसायी वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष राजेश नेभानी ने कहा कि कपड़ा व्यापारी हमेशा सरकार के साथ हैं, लेकिन इस कानून से व्यापारियों का उत्पीड़न होगा। सरकार को चाहिए कि व्यापारियों के साथ बैठ करके बातचीत करे और इस समस्या का हल निकाले। इस फैसले पर सख्त निर्णय लेते हुए तत्काल रोक लगाने की जरूरत है।
अब व्यापारियों का साथ दे सरकार
बिस्कुट मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरशद जमाल समानी ने कहा कि व्यापारियों के उत्पीड़न के लिए सर्वे छापे का जो आदेश दिया गया है, मैं उसका विरोध करता हूं। पूरे लॉकडाउन में व्यापारियों ने सरकार का सहयोग किया। अब सरकार को व्यापारियों की मदद करनी चाहिए। इस फैसले को तत्काल स्थगित कर दें।
ये है व्यवस्था
वाणिज्य कर कमिश्नर अमृता सोनी ने जो आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक सालाना 10 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले पांच व्यापारियों के वहां प्रतिमाह सर्वे किया जाएगा। पांच करोड़ से दस करोड़ के टर्नओवर वाले तीन व्यापारी, डेढ़ करोड़ से पांच करोड़ टर्नओवर वाले एक और सालाना डेढ़ करोड़ रुपये से कम आय वाले एक व्यापारी का सर्वे किया जाना है। सर्वे के दौरान स्टॉक ज्यादा मिला या फिर टर्नओवर में किसी तरह की हेरफेर मिली तो जब्त करने, विवेचना व कार्रवाई का प्रावधान भी है।
एसआईबी एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 राजेश सिंह ने कहा कि ईमानदारी व्यापारियों की सहूलियत और सुविधा को देखते हुए इस अभियान को शुरू किया गया है। पहले जो जांच होती थी, यह प्रक्रिया उससे सरल है। जरूरी साक्ष्यों के आधार पर संबंधित विषयों पर ही जांच की जाएगी। टीम महीने में दो से तीन बार ही जांच कर सकती है। बार-बार जांच प्रक्रिया से व्यापारियों को भी नहीं गुजरना पड़ेगा। व्यापारी हित को देखते हुए ही फैसला लिया गया है।