किसानों-नौजवानों को लाभ
नीम कोटेड यूरिया से किसानों को समय से खाद सुलभ होगी। वहीं, करीब बीस हजार लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रोजगार मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। खाद कारखाने से उत्तर प्रदेश और अन्य सीमावर्ती राज्यों को पर्याप्त खाद की उपलब्धता तो होगी ही आयात पर से निर्भरता भी कम होगी।
8603 करोड़ की लागत से बना कारखाना, रोजाना 3850 मीट्रिक टन उत्पादन
गोरखपुर खाद कारखाने के निर्माण पर 8603 करोड़ रुपये की लागत आई है। कारखाना परिसर में दक्षिण कोरिया की विशेष तकनीक से 30 करोड़ रुपये की लागत से विशेष रबर डैम बनाया गया है, जिस पर गोलियों का भी असर नहीं होता है। कारखाने की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 3850 मीट्रिक टन और प्रतिवर्ष 12.7 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उत्पादन की है। खाद कारखाने की स्थापना व संचालन की जिम्मेदारी हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) ने निभाई है। एचयूआरएल एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें कोल इंडिया लिमिटेड, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल कार्पोरेशन प्रमोटर्स हैं, जबकि इसमें फर्टिलाइजर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कार्पोरेशन लिमिटेड भी साझीदार हैं।
कारखाने का प्रिलिंग टावर दुनिया में सबसे ऊंचा
गोरखपुर खाद कारखाने में बना प्रिलिंग टावर विश्व में सबसे ऊंचा है। इसकी ऊंचाई कुतुब मीनार की ऊंचाई से दोगुनी से अधिक है। प्रिलिंग टावर से खाद के दाने नीचे आएंगे तो इनकी गुणवत्ता सबसे अच्छी होगी। एक खास बात यह भी है कि इस खाद कारखाना में 30 फीसदी से ज्यादा पूर्वांचल के युवाओं को नौकरी दी गई है। इनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है।