गोरखपुर। पूरी दुनिया को योग का पाठ पढ़ाने वाले योग गुरु परमहंस योगानंद के गुरु युक्तेश्वर गिरि ने परमहंस योगानंद को दस साल तक योग ध्यान का प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद परमहंस योगानंद ने पूरी दुनिया में ध्यान की लौ जलाई। यह आज भी प्रासंगिक है।
परमहंस योगानंद के गुरु युक्तेश्वर गिरि की जयंती रविवार को धूमधाम से मनाई जाएगी। राजेंद्रनगर में अनुयायी भजन, पुष्पांजलि व ध्यान करेंगे। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया के सदस्य व अनुयायी सुधीर यादव ने बताया कि परमहंस योगानंद ने अपनी पुस्तक योगी कथामृत में अपने गुरु के बारे में लिखी है। उन्होंने लिखा है कि स्वामी युक्तेश्वर ज्ञान के तेज मंडल से आलोकित थे।
उन्होंने लिखा है कि गुरु युक्तेश्वर के पवित्र चरणों का स्पर्श करते समय सदा ही रोमांचित हो उठता था। उनकी ओर से एक सूक्ष्म विद्युत धारा प्रवाहित होती थी। जब भी अपने गुरु के चरणों पर माथा टेकता था, संपूर्ण शरीर जैसे एक मुक्ति प्रदायक तेज से भर जाता था। स्वामी युक्तेश्वर का अंतर्ज्ञान अंतर्भेदी था। वे अपने शिष्यों व आश्रम में आने वालों के विचारों को पढ़ना भी जानते थे, लेकिन उन्होंने अपनी इस दिव्य शक्ति का प्रयोग उनके विचारों की स्वतंत्रता का अतिक्रमण करने के लिए नहीं किया।