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गोरखपुर रिंग रोड में फिर अड़ंगा: किसानों का हंगामा, बोले- कौड़ियों के भाव नहीं देंगे जमीन

Fri, 26 May 2023 03:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

एनएचएआई परियोजना प्रबंधक भवेश अग्रवाल ने कहा कि जंगल कौड़िया-जगदीशपुर फोरलेन रिंग रोड का निर्माण कराया जाना है। इसका एग्रीमेंट हो गया है। जून में निर्माण कार्य शुरू होना है। अभी जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। कैंप लगाकर मुआवजा दिया जा रहा है। जमीन मिलने के बाद काम शुरू कराया जाएगा।
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बैठक में हंगामा - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में जंगल कौड़िया-जगदीशपुर फोरलेन रिंग रोड के निर्माण में एक बार फिर अड़ंगा लग गया है। योजना को अमली जामा पहनाने की सारी तैयारी हो चुकी है। तीन माह पूर्व केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी शिलान्यास कर चुके हैं, लेकिन अब किसानों ने फोरलेन में आने वाली अपनी भूमि का मुआवजा लेने से इन्कार कर दिया है।

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उनका कहना है कि सरकार उनकी जमीन कौड़ियों के भाव लेना चाहती है। उन्हें जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह बाजार भाव से 20 गुना कम है। किसानों का कहना है कि वे इस दर पर किसी भी हाल में अपनी जमीन नहीं देंगे। दूसरी ओर, वन विभाग ने भी अब तक रिंग रोड के निर्माण के लिए एनओसी नहीं दी है।

किसान खफा, बोले- कौड़ियों के भाव नहीं देंगे जमीन
जंगल कौड़िया-जगदीशपुर फोरलेन रिंग रोड के निर्माण की बाधा दूर होने का नाम नहीं ले रही है। अब किसानों ने मुआवजे को लेकर शासन-प्रशासन के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकार की ओर से दिए जा रहे मुआवजे को काफी कम बताया है। उनका कहना है कि सरकार उनकी जमीन बाजार भाव से 20 गुना कम कीमत पर लेना चाहती है, लेकिन वे ऐसा नहीं होने देंगे। इसको लेकर आज अफसरों के सामने हंगामा किया।
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तीन गांवों के किसानों को बृहस्पतिवार को मुआवजा लेने के लिए सरैया गांव के पंचायत भवन में बुलाया गया था। किसान मौके पर पहुंचे, लेकिन मुआवजा लेने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। किसानों ने कहा कि जो मुआवजा दिया जा रहा है, बाजार रेट उससे 20 गुना अधिक है। पंचायत भवन में एनएचएआई और भू अध्याप्ति के अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भू स्वामी टस से मस नहीं हुए। उन्होंने मुआवजा कम होने की बात कहते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और बैठक छोड़कर चले गए। बैठक में परसिया, रसूलपुर और सोनराइच गांव के किसानों को मुआवजा लेने के लिए बुलाया गया था।
 

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2016 के सर्किल रेट पर मुआवजा मंजूर नहीं

किसानों का कहना है कि रिंग रोड निर्माण में सरकार की तरफ से जिस दर पर मुआवजे का भुगतान किया जा रहा है वह वर्तमान बाजार दर से बहुत कम है। मुआवजा वर्ष 2016 के सर्किल रेट को आधार बनाकर दिया जा रहा है। पिछले आठ वर्षो में सर्किल रेट नही बढ़ा है, लेकिन जमीनों का बाजार भाव 2016 की दर का लगभग 20 गुना हो गया है। सरकार 2016 के सर्किल रेट से चार गुना करके 1 लाख 40 हजार रुपये प्रति डिसमिल की दर से भुगतान कर रही है। इस दर पर भुगतान से किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वे इस दर पर अपनी जमीन सरकार को नहीं देंगे।

वन विभाग की एनओसी भी राह में रोड़ा
जंगल कौड़िया-जगदीशपुर फोरलेन रिंगरोड के निर्माण में वन विभाग की एनओसी का रोड़ा भी फंस गया है। एनओसी नहीं मिलने के कारण सड़क का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जबकि शिलान्यास हुए तीन माह हो चुके हैं। 26.6 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण पर 1925.27 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।

शहर के चारों तरफ बिछ रहे फोरलेन के जाल के बीच गोरखपुर-लखनऊ मार्ग को कालेसर-जंगल कौड़िया फोरलेन से पहले ही जोड़ दिया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर एनएचएआई ने जंगल कौड़िया से जगदीशपुर तक बाई पास फोरलेन बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया। यह प्रोजेक्ट हरित क्षेत्र है और इसमें पुरानी सड़क को शामिल नहीं किया गया है। इसके बन जाने से शहर के चारों तरफ रिंग रोड बन जाएगा।

मार्च में नितिन गडकरी ने दिग्विजयनाथ पार्क में शिलान्यास किया तो लगा कि जल्द ही इसका कार्य शुरू हो जाएगा। विजय कंस्ट्रक्शन नामक फर्म को टेंडर मिला है। एनएचएआई के मुताबिक, इसका निर्माण कार्य जून में शुरू होना है और दो साल में काम पूरा करना है, लेकिन अभी न तो जमीन का अधिग्रहण हो पाया है और न ही वन विभाग से एनओसी मिल पाई है।

एनएचएआई परियोजना प्रबंधक भवेश अग्रवाल ने कहा कि जंगल कौड़िया-जगदीशपुर फोरलेन रिंग रोड का निर्माण कराया जाना है। इसका एग्रीमेंट हो गया है। जून में निर्माण कार्य शुरू होना है। अभी जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। कैंप लगाकर मुआवजा दिया जा रहा है। जमीन मिलने के बाद काम शुरू कराया जाएगा।
 
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